Ayodhya terrorist attack included human bomb know when it happened - अयोध्या आतंकवादी हमले में शामिल था मानव बम भी, जानिए कब क्या हुआ DA Image
18 नबम्बर, 2019|10:42|IST

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अयोध्या आतंकवादी हमले में शामिल था मानव बम भी, जानिए कब क्या हुआ

 

 

एफआईआर में लिखा है कि परिसर के भीतर कुछ आतंकवादी थे, इनकी पीठ पर बैग टंगे हुए थे, हाथों में स्वचालित हथियारों से फोर्स की ओर फायर करते एवं बम फेंकते हुए मुख्य परिसर की ओर चले आ रहे थे। सीआरपीएफएफ कमांडर विजेरो टिनी एवं महिला कमांडर संतो देवी के नेतृत्व में मुठभेड़ शुरू हुई। आनंद सिंह सीआरपीएफ प्रभारी सेनानायक ने जनरेटर रूम के निकट मकान पर चढ़कर मोर्चा संभाला। एसएसपी अविनाश चंद्र ने पुलिस कर्मियों के साथ मोर्चा संभाला, अन्य पुलिस अधिकारियों ने सीता रसोई के पास मोर्चा संभाला। थोड़ी देर बाद आतंकवादियों की तरफ से फायर बंद हो गया। आधा घंटा इंतजार करने पर विश्वास हुआ कि आतंकवादियों के पास बम कारतूस समाप्त हो गया है तो आगे बढ़ा गया।
आतंकवादी और बरामद सामान: एफआईआर में आतंकवादियों के पास से हुई बरामदगी का भी जिक्र है। इसके मुताबिक इनर कार्डेन के पास सीमेंटेड रास्ते पर दो आतंकवादी मृत मिले थे। इनमें से एक के पास से एक एके-47 राइफल, 25 जिंदा कारतूस, दो मैगजीन, चाइनीज पिस्टल, पांच ग्रेनेड, कुरान शरीफ बरामद हुए थे। दूसरे आतंकवादी के पास से एक एके-47 राइफल, दो मैगजीन, 28 कारतूस तथा चार ग्रेनेड बरामद हुई थी। सीता रसोई के पास झाड़ी में दो आतंकवादी मृत मिले थे, इनमें से एक मानव बम था, जिसके शरीर के हिस्से इधर-उधर पड़े हुए थे। इसके पास से एके-47 राइफल, दो मैगजीन, राकेट लांचर ट्यूब, 27 कारतूस बरामद किया गया था। दूसरे मृत आतंकवादी के पास से एक एके-47 राइफल, 19 कारतूस, एक पिस्टल, राकेट लांचर, चार ग्रेनेड बरामद हुआ था। जेनरेटर रूम के पास ढलान पर पांचवां आतंकवादी मृत मिला था, जिसके पास से भी एक एके-47 राइफल, तीन मैगजीन, दो ग्रेनेड, 41 कारतूस बरामद किए गए थे।
बार एसोसिएशन के विरोध से हस्तान्तरित हुआ केस
अयोध्या। पांच जुलाई 2005 को रामजन्मभूमि पर हुए हमले के आरोपी आतंकियों के केस की सुनवाई के दौरान फैजाबाद बार एसोसियेशन के विरोध जताया और आतंकियों की पैरवी से इनकार कर दिया था। इसके बाद लखनऊ पीठ के समक्ष याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें अधिवक्ता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था पर बार ने प्रस्ताव पारित कर किसी भी अधिवक्ता के जाने पर पूरी तरह से रोक लगा दिया। इसके बाद 20 सितम्बर 2006 को यह केस स्पेशल कोर्ट, प्रयाग के लिए हस्तान्तरित कर दिया गया। इससे पहले फैजाबाद कोर्ट में आतंकियो की पैरवी के लिए न्याय मित्र के रूप में अधिवक्ता राजेन्द्र तिवारी और    नलिन सिंह फिर जमाल अहमद सामने आए लेकिन बार एसो. के विरोध के कारण इन सभी को पीछे हटना पड़ा।

05 जुलाई 2005 को आतंकियों ने अयोध्या मेंे अधिग्रहित परिसर में किया हमला, रिपोर्ट इसी दिन दर्ज की गई।

22जुलाई 2005 को चार आरोपितों एवं 28 जुलाई को एक आरोपित की गिरफ्तारी हुई।
26 नवंबर 2006 को जिला जज फैजाबाद ने आरोप तय किया, फिर गवाही शुरू की गई।

08दिसंबर 2006 को मुकदमा हाईकोर्ट ने फैजाबाद से इलाहाबाद जिला न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया।  

30नवंबर 2017 को एसएसपी के पत्र पर सुरक्षा की दृष्टि से नैनी जेल में सुनवाई शुरू हुई थी।
09जून 2019 को नैनी सेंट्रल जेल में इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई पूरी हुई और फैसले की तारीख मुकर्रर की गई। 

18जून 2019 को नैनी सेंट्रल जेल में विशेष जज दिनेश चंद्र ने चार आरोपितों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।  

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