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अयोध्या आतंकवादी हमला : अभियोजन की दलीलों को कोर्ट ने सही पाया

अयोध्या में अधिग्रहीत परिसर पर 14 साल पहले हुए आतंकी हमले  के मामले में सुनवाई के बाद विशेष जज दिनेश चंद्र ने मंगलवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने चार आरोपितों को उम्रकैद की सजा का फैसला शासकीय अधिवक्ता गुलाब चंद्र अग्रहरि तथा बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं शमसुल इस्लाम एवं अन्य की लंबी दलीलों को सुनने, पेश किए गए दस्तावेजी सबूतों, असलहों, ध्वस्त गाड़ी आदि को देखने के बाद सुनाया है। 

कोर्ट ने कहा कि आरोपितों के खिलाफ मामला संदेह से परे साबित करने में अभियोजन पक्ष सफल रहा है इसलिए आरोपित दंडित किए जाने के योग्य हैं। अभियोजन पक्ष ने आरोपितों के द्वारा की गई आतंकवादी गतिविधियों तथा अपराध की गंभीरता को देखते हुए अधिकतम कड़े दंड से दंडित करने की मांग की थी। 

जब मुठभेड़ शुरू हुई: एफआईआर में लिखा है कि परिसर के भीतर कुछ आतंकवादी थे, इनकी पीठ पर बैग टंगे हुए थे, हाथों में स्वचालित हथियारों से फोर्स की ओर फायर करते एवं बम फेंकते हुए मुख्य परिसर की ओर चले आ रहे थे। सीआरपीएफएफ कमांडर विजेरो टिनी एवं महिला कमांडर संतो देवी के नेतृत्व में मुठभेड़ शुरू हुई। आनंद सिंह सीआरपीएफ प्रभारी सेनानायक ने जनरेटर रूम के निकट मकान पर चढ़कर मोर्चा संभाला। एसएसपी अविनाश चंद्र ने पुलिस कर्मियों के साथ मोर्चा संभाला, अन्य पुलिस अधिकारी सीता रसोई के पास मोर्चा संभाले। थोड़ी देर बाद आतंकवादियों की तरफ से फायर बंद हो गया। आधा घंटा इंतजार करने पर विश्वास हुआ कि आतंकवादियों के पास बम कारतूस समाप्त हो गया है।

आतंकवादी और बरामद सामान: एफआईआर में आतंकवादियों के पास से हुई बरामगदी का भी जिक्र है। इसके मुताबिक इनर कार्डेन के पास सीमेंटेड रास्ते पर दो आतंकवादी मृत मिले थे। इनमें से एक के पास से एक एके-47 राइफल, 25 जिंदा कारतूस, दो मैगजीन, चाइनीज पिस्टल, पांच ग्रेनेड, कुरान शरीफ बरामद हुआ था।  

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  • Web Title:Ayodhya Terrorist Attack: Courts findings proved right by the prosecution