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जीआईएस से आवास विकास पता करेगा अपनी खाली सम्पत्तियां

एलडीए ने एक संस्था से सम्पर्क साधा, एलडीए भी जीआईएस मैपिंक गरायी, लैण्ड आडित का भी शुरू कराया काम

लखनऊ। प्रमुख संवाददाता

एलडीए की तर्ज पर आवास विकास परिषद भी अपनी कालोनियों की जीआईएस सर्वे कराएगी। इसके जरिए परिषद अपनी योजनाओं में खाली जमीनों के बारे में जानकारी करेगी। जीआईएस सर्वे के लिए परिषद एक निजी संस्था की मदद लेगी। परिषद को सर्वे से करोड़ों की जमीन खाली मिलने की उम्मीद है। जो जमीनें खाली मिलेंगी उन्हें नियोजित कर परिषद बेचेगा। एलडीए को भी जीआईएस सर्वे में अरबों की खाली जमीनें मिली हैं।

आवास विकास ने अभी तक शहर में चार बड़ी कालोनियों का विकास कराया है। इसमें सबसे पुरानी कालोनी इन्दिरानगर है। इसके बाद विकासनगर, राजाजीपुरम और फिर रायबरेली रोड स्थित वृन्दावन योजना है। एलडीए की तरह परिषद ने भी अपनी योजनाओं में तमाम जगह भविष्य की प्लानिंग के लिए जमीनें छोड़ रखी थीं। इन जमीनों पर अब तमाम तरह के अवैध कब्जे की बात सामने आ रही है। आवास विकास परिषद अपनी योजनाओं की सभी जमीनों की अब ताजा स्थिति जानना चाहता है। उसके पास पहले कितनी जमीनें थीं। कितनी उसने अधिग्रहित की। कितनी बेची और मौके पर कितनी खाली हैं। इसी के लिए परिषद जीआईएस (जियोग्राफिक इन्फार्मेशन सिस्टम) सर्वे कराने जा रहा है। भविष्य के लिए आरक्षित की जमीनों के मिलने से परिषद को करोड़ों का फायदा होगा। इससे इस बात का भी पता चलेगा कि कहां और किन क्षेत्रों में विकास कार्य अधूरा है। निजी एजेन्सी ने परिषद के अधिकारियों से उसकी विभिन्न योजनाओं के ले आउट तथा जमीन अधिग्रहण से सम्बंधित दस्तावेज मांगे हैं।

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अवैध निर्माणों के बारे में भी हो सकेगी जानकारी

आवास विकास की कालोनियों में भी बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हुआ है। आवास विकास परिषद को जीआईएस सर्वे से कालोनियों में हुए अवैध निर्माणों के बारे में भी जानकारी हो सकेगी। पूर्व में कैसे परिषद ने मकान दिया था और अब उनकी ताजा स्थिति क्या है। किस मकान में दुकान खुल गयी इसके बारे में भी जानकारी हो सकेगी।

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परिषद ने जीआईएस सर्वे कराने की तैयारी की। आवास आयुक्त ने इसके लिए निर्देशित किया है। निजी संस्था से इस सम्बंध में बात हुई है। जीआईएस सर्वे से आवास विकास की कालोनियों की तस्वीर सामने आ जाएगी। जमीनों के साथ विकास की भी तस्वीर परिषद के सामने होगी।

उदयराज सिंह, अपर आवास आयुक्त, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद

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