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बागपत चीनी मिल की पेराई क्षमता 5000 टीसीडी हुई

बागपत चीनी मिल की पेराई क्षमता 5000 टीसीडी हुई

संक्षेप:

Lucknow News - - मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में फैसला लखनऊ, विशेष संवाददाता - मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में फैसला लखनऊ, विशेष संवाददाता

Feb 06, 2026 09:00 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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मुख्य सचिव एसपी गोयल ने किसान सहकारी चीनी मिल बागपत की पेराई क्षमता 2500 टीसीडी से बढ़ाकर 5000 टीसीडी करने की मंजूरी दी है। नवीनतम तकनीक पर आधारित रिफाइंड शुगर उत्पादन के लिए नई चीनी मिल स्थापित करने संबंधित संशोधित प्रायोजना प्रस्ताव पर अनुमोदन प्रदान किया गया। इस परियोजना की प्रस्तावित लागत 40702.57 लाख रुपये (लगभग 407 करोड़ रुपये) है। मुख्य सचिव ने शुक्रवार को प्रायोजन रचना एवं मूल्यांकन प्रभाग (पीआईबी सचिवालय) नियोजन विभाग की 101वीं बैठक में यह मंजूरी दी। परियोजना के वित्त पोषण की व्यवस्था 50 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा अंश पूंजी तथा शेष 50 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा ऋण के रूप में की जाएगी।

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बैठक में निर्देश दिए गए कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के शासकीय बजट में 10000 लाख रुपये (100 करोड़ रुपये) के ऋण के रूप में प्रावधान कराए जाने के लिए आवश्यक प्रस्ताव शीघ्र प्रेषित किया जाए। बैठक में अवगत कराया गया कि नई चीनी मिल स्थापना के प्रमुख कारक कमांड एरिया में गन्ने की पर्याप्त उपलब्धता है। अगले पांच वर्षों में पेराई के लिए प्रतिवर्ष लगभग 8.00 लाख टन गन्ना उपलब्ध रहने की संभावना है। वर्तमान मशीनरी 30 वर्ष से अधिक पुरानी होने के कारण स्टीम व बैगास की अधिक खपत हो रही है। गत पेराई सत्र 2024-25 में मिल द्वारा लगभग 4.49 लाख टन गन्ने की पेराई की गई थी। अतिरिक्त गन्ना वर्तमान में निजी क्षेत्र की चीनी मिलों को जा रहा है। नवीनतम प्रौद्योगिकी उपकरणों की स्थापना तथा मिल की क्षमता विस्तार से दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा। आधुनिक तकनीक से 5000 टीसीडी क्षमता वाली गन्ना पेराई मात्र 22 घंटे के औसत संचालन में संभव हो जाएगी। इससे मिल की कार्यावधि कम होने पर किसानों के गन्ने की समय पर पेराई सुनिश्चित होगी, जिससे गन्ना मूल्य भुगतान में सुगमता आएगी तथा किसानों की आय में स्थिरता बनी रहेगी। परियोजना के अंतर्गत हाई प्रेशर 100 टीपीएच, 67 बार बॉयलर, 10 मेगावाट पॉवर टरबाइन तथा एसीवीएफडी (वेरिएबल फ्रीक्वेंसी ड्राइव) मोटरों के उपयोग से पावर बचत होगी तथा स्टीम खपत में कमी आएगी। बैगास की अधिक बचत सुनिश्चित होगी। रिफाइन्ड शुगर उत्पादन से चीनी की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा बाजार में प्रतिस्पर्धी दरों पर बिक्री संभव हो सकेगी। चीनी हानियों को नियंत्रित कर चीनी परता बढ़ाई जाएगी तथा उत्पादन लागत में कमी आएगी।