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उपचुनाव के बाद राज्यसभा में विपक्षी दलों की एकता की एक और परीक्षा

रचना सरन - राज्य मुख्यालय

यूपी में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ विपक्षी दलों की एकता की एक और परीक्षा की घड़ी आ गई है। मामला अगले माह राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव का है और बड़ा सवाल यह है कि 10वीं सीट किसके खाते में जाएगी? क्या समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस में इस सीट को लेकर कोई एक राय बन पाएगी या विपक्षी एका के अभाव में यह सीट भी भाजपा के खाते में चली जाएगी।

राज्यसभा की खाली हो रही 10 सीटों में से 6 सीट सपा, 2 सीट बसपा और एक-एक सीट भाजपा और कांग्रेस की है लेकिन अगले महीने होने वाले चुनाव में सर्वाधिक फायदा भाजपा को होगा। विधानसभा में सदस्यों की संख्या के हिसाब से 8 सीट सीधे भाजपा की झोली में जाएंगी जबकि एक सीट सपा की पक्की है। बची हुई एक सीट को लेकर ही सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों में जोर आजमाइश हो सकती है। हालांकि अगर इस सीट पर विपक्षी दलों में कोई एक राय बन जाती है तो फिर यह सीट विपक्ष को मिल सकती है। अलबत्ता भाजपा को एक और सीट मिल जाएगी।

वोट का आंकड़ा

राज्यसभा चुनाव में एक सीट जीतने के लिए करीब 37 वोट चाहिए। इस हिसाब से भाजपा के 8 प्रत्याशियों के चुनाव जीतने के बाद उनके पास 28 वोट बचेंगे। सपा अपने बूते एक सीट निकाल लेगी और उसके पास 10 वोट बचेगें। ऐसे में, बसपा के 19 और कांग्रेस के 7 वोट मिलकर आंकड़ा 36 पर पहुंचता है जबकि भाजपा को 9 अतिरिक्त वोट की व्यवस्था करनी होगी। कुल मिलाकर बगैर विपक्षी दलों के एक हुए 10वीं सीट नहीं मिलेगी।

रिटायर होने वालों में बड़े नाम

राज्यसभा की जो 10 सीट खाली हो रही हैं उनमें लगभग हर दल के बड़े नेता शामिल हैं। सपा के किरनमय नन्दा, जया बच्चन, नरेश अग्रवाल, बसपा से पार्टी मुखिया मायावती (पहले ही इस्तीफा दे चुकी हैं), भाजपा से विनय कटियार और कांग्रेस से प्रमोद तिवारी हैं।

उपचुनाव में नहीं हुआ एका

गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर विपक्ष एका नहीं कर पाया। इसलिए राज्यसभा चुनाव में एका होने को लेकर फिलहाल संशय की स्थिति है। हालांकि 10वीं सीट को लेकर कोशिशे शुरू हो गई है। फिलहाल माना जा रहा है कि अगर मायावती चुनाव लड़ती हैं तो एका की राह आसान होगी। वहीं दूसरे ऐसे नामों पर विचार चल रहा है जिन पर एक राय बन सके।

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  • Web Title:Another test of unity of Opposition parties in the Rajya Sabha after the bypoll