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कोविड के खतरे के बीच पंकज उधास लखनऊ आए थे गजल सुनाने

फाइल फोटो::: अवार्ड लेते हुए -मशहूर गजल गायक पंकज उधास के निधन से लखनऊ की

कोविड के खतरे के बीच पंकज उधास लखनऊ आए थे गजल सुनाने
हिन्दुस्तान टीम,लखनऊMon, 26 Feb 2024 10:55 PM
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-मशहूर गजल गायक पंकज उधास के निधन से लखनऊ की संगीत दुनिया में शोक

-40 साल में कई बार पंकज उधास ने लखनऊ को अपनी गजलों से रोशन किया

लखनऊ। कार्यालय संवाददाता

गजल को नया नाम और युवाओं को गजल का मुरीद बनाने वाले गजल गायक पंकज उधास ने सोमवार को दुनिया से अलविदा कह दिया। पंकज उधास और लखनऊ का नाता बेजोड़ था। ये रिश्ता भी संगीत की वजह से बना था। यही कारण था कि जब भी पंकज उधास को लखनऊ में प्रस्तुति देने का मौका मिलता तो कभी मना नहीं करते थे। कहते थे कि लखनऊ में गजल सुनने की जो दीवानगी है वो कम ही दिखती है।

पिछले चालीस वर्षों में पंकज उधास ने लखनऊ में दर्जनों पर अपन गजल से समां बांधा। साल 1985 में मयूर पंख की ओर से होटल क्लार्क अवध में सजी गजल की महफिल हो या वर्ष 2021 में फरवरी में सजी महफिले दयाल। हर जगह पंकज उधास ने अपने गायकी से लोगों का दिल जीता। फरवरी 2021 में सुशांत गोल्फ सिटी स्थित दयाल बाग में हुए महफिले दयाल लखनऊ में उनका अन्तिम कार्यक्रम भी रहा। इसी कार्यक्रम में गजल गायक पंकज उधास और लोकगायिका पदमश्री मालिनी अवस्थी को दयाल यथार्थ अवध सम्मान से सम्मानित भी किया था।

-आखिरी शाम में निकलो न बेनकाब

महफिल-ए-दयाल के आयोजक राजेश सिंह ने बताया कि पंकज उधास ने कई गजले सुनायी थी। इस शाम में जहां पंकज उधास ने अपने चाहने वालों की फरमाइशे पूरी की तो वहीं दूसरी ओर खुद से चुनिन्दा गजले भी सुनायी। पंकज उधास ने निकलो न बेनकाब, चिट्ठी आयी है आयी है, और आहिस्ता कीजिए बातें गजलें सुनाईं।

-कोविड के खतरे के बीच आए पंकज

महफिले दयाल के आयोजक राजेश सिंह ने बताया कि फरवरी 2021 में कोरोना का खतरा खत्म नहीं हुआ था। कोई भी कलाकार आने के लिए मना कर देता लेकिन पंकज उधास की बात और लखनऊ से मोहब्बत अलग थी। उन्होंने कोविड के खतरे के बावजूद लखनऊ आने का आमंत्रण स्वीकार किया। पंकज उधास को जब सम्मान मिला तो उस वक्त भी वह मास्क लगाए हुए थे। वहीं फरवरी 2020 को अमेरिका में लॉकडाउन की वजह से कार्यक्रम बीच छोड़कर पंकज भारत लौटे थे उसके बाद फरवरी 2021 में अगला कार्यक्रम लखनऊ में किया था।

-युवाओं को गजलों से जोड़ दिया

मशहूर गजल गायक गुलशन भारती ने कहा कि यूं तो कई गजल गायक हुए हैं लेकिन पंकज उधास कई मायनों में अलग हैं। उनकी गजलों को आम जनता में खूब शोहरत मिली। उन्होंने कहा कि आज युवाओं में गजलों को लेकर जो क्रेज बढ़ा है। उसमें पंकज उधास का बहुत बड़ा योगदान है। कहा कि साल 1985 में मयूर पंख के कार्यक्रम में पंकज उधास को लाइव सुना था। उस्ताद युगांतर सिंदूर ने कहा कि मशहूर गजल गायक पंकज उधास के निधन की अचानक ख़बर से बेहद आहत हूं। गजल गायकी के अलग-अलग दौर आए हैं, लेकिन मैं कह सकता हूं कि गजल गायकी को इतने सरल अंदाज में आम श्रोताओं तक पहुंचने का श्रेय, पंकज उधास को ही जाता है।

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