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गम, गुस्से और मातम के माहौल में दिखा बरौलिया गांव

सुरेंद्र हत्याकांड

बरौलिया के जन नायक को छीन ले गया काला रविवार

अमेठी। हिन्दुस्तान संवाद

रविवार का दिन बरौलिया के लिए काला दिन था। अराजक तत्वों ने 15 सालों से गांव की सत्ता पर कायम सुरेंद्र सिंह को देर रात गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। सुबह घटना की खबर जंगल में आग की तरह फैली तो उस क्षेत्र से होने वाला हर रास्ता सुरेंद्र सिंह के घर को ही जाता दिखा। दोपहर 12 बजे तक जब सुरेंद्र सिंह का शव लखनऊ से गांव आया तब तक हजारों लोगों का जमावड़ा उनके घर पर लगा हुआ था। जमे लोगों में राज नेताओं से लेकर बड़ी संख्या में महिलाएं व नौजवान थे। जातीय बंधन से परे गांव में काम करने वाले सुरेंद्र सिंह की अंतिम यात्रा का हर कोई गवाह बनना चाहता था। पूरे निधान निवासी छोटेलाल ने कहा कि भैया अब हमाय सबकै की सुने। आग से घर जलिगा रहा तो भैया सब इंतजाम करे रहें। अब तौ सब चला गया। सुरेंद्र सिंह अपने पैतृक गांव अमर बोझा में न रहकर कमालगंज चौराहे के पास बनवाए आवास पर रहते थे। यहीं उन्होंने अर्द्धनारीश्वर मंदिर की स्थापना की थी। जहां हर वर्ष उनके द्वारा कथा- भागवत भंडारे, सामूहिक विवाह आदि सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता था। औसत रूप से कम सवर्ण आबादी वाले गांव में पांच साल वे खुद जबकि दस साल से उनके लोग ही प्रधान हैं। गांव का कोटा भी उनके छोटे भाई की पत्नी के नाम है। ऐसे में उन्होंने अपनी छवि जन नायक की बना ली थी। सुरेंद्र सिंह की हत्या के बाद उमड़ा जनसैलाब उनकी इसी छवि का तस्दीक कर रहा था।

रुंधे गले से बेटा बोला, जय भाजपा-तय भाजपा

सुरेंद्र सिंह के इकलौते बेटे अभय प्रताप सिंह उर्फ सूरज का रो रोकर बुरा हाल है। स्मृति ईरानी जैसे ही घर पहुंचीं बिलख रहे सूरज ने कहा स्मृति दीदी जिंदाबाद। जय भाजपा-तय भाजपा। यह सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। स्मृति ने बेटे को गले से लगा लिया।

मंत्री व विधायकों का रहा जमावड़ा

सुरेंद्र सिंह की अंत्येष्टि में राज्यमंत्री सुरेश पासी, मोहसिन रजा, विधायक मयंकेश्वर शरण सिंह, विधायक राकेश सिंह, दल बहादुर कोरी, अनंत विक्रम सिंह, गजाधर सिंह, दुर्गेश त्रिपाठी, तेजभान सिंह, जंग बहादुर सिंह समेत भाजपा के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

आईजी समेत प्रशासनिक अधिकारियों का रहा जमावड़ा

मौके पर आईजी जोन संजीव गुप्ता के साथ ही प्रभारी डीएम प्रभुनाथ, एसपी राजेश, एडीएम वंदिता श्रीवास्तव, तीन सर्किल के सीओ, तीन एसडीएम, कई थानों के एसओ, पीएसी व सीआईएसएफ के जवान लगाए गए थे। बड़ी संख्या में महिला पुलिस व एंबुलेंस की व्यवस्था की गई थी।

गश खाकर गिरे विधायक तिलोई

अंत्येष्टि के दौरान ही विधायक तिलोई मयंकेश्वर शरण सिंह की शुगर लो हो जाने के चलते गश खाकर गिर पड़े। उन्हें तत्काल मौजूद एंबुलेंस के माध्यम से उपचारित किया गया।

माता-पिता के साथ छूट गया परिवार

अभी सुरेंद्र सिंह के माता कमला पिता शिवभवन सिंह भी जीवित हैं। वे अपने पीछे पत्नी व दो पुत्रियों के साथ एक पुत्र छोड़ गए हैं। बड़ी पुत्री पूजा की शादी कानपुर रोड रायबरेली के नेताजी सुभाष नगर में जबकि छोटी पुत्री प्रतिमा की शादी हरचंदपुर रायबरेली के बल्दूपुर में हुई है। पुत्र अभय प्रताप सिंह अभी अविवाहित है।

नहीं साफ हुई घटना के पीछे की वजह

सुरेंद्र सिंह राजनैतिक व्यक्ति जरूर थे, लेकिन उनका जीवन अजातशत्रु के रूप में था। उनकी जमीन-जायदाद को लेकर भी कभी किसी से कोई लड़ाई नहीं हुई थी। उनके छोटे भाई जितेंद्र सिंह की मौत हो चुकी है, उनकी पत्नी के नाम ही कोटे की दुकान है। जबकि बड़े भाई नरेंद्र सिंह साथ ही रहते हैं। गांव अमरबोझा वाले घर पर माता-पिता के साथ भाईयों का परिवार रहता था, जबकि कमालगंज वाले घर पर सुरेंद्र बरौलिया का परिवार रहता था। ऐसे में उनकी हत्या क्यों हुई इसका अंदाजा गांव वाले भी नहीं लगा पा रहे हैं। पुलिस ने कुछ संदिग्धों को हिरासत में जरूर लिया है, लेकिन अब तक वे भी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। घटना के पीछे की वजह तो अब खुलासे के बाद ही पता चल सकेगी।

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