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सालों बाद सावन का बना है अद्भुत योग, जानिए किन मंत्रों के जाप से बरसेगी कृपा

सालों बाद सावन का बना है अद्भुत योग, जनिए किन मंत्रों के जाप से बरसेगी कृपा

सनातन धर्म में द्वादश मास में श्रावण मास का विशेष महत्व दिया गया है। यह मास देवाधिदेव महादेव का विशेष मास कहा जाता है।  इस मास में भगवान शिव जी की भक्तों पर विशेष कृपा होती है। इस महीने में रुद्राभिषेक महामृत्युंजय मंत्र का जाप पंचाक्षर आदि मंत्रों का जाप अनेक प्रकार से शुभकारी होता है।
अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक पं. संतोषजी महाराज ने बताया कि इस वर्ष  श्रावण मास का प्रारंभ शनिवार को श्रवण नक्षत्र में तथा प्रीति योग में हुआ है, जो बहुत ही शुभकारी है। यह अद्भुत योग कई वर्षों के बाद हमें प्राप्त हुआ है। शनि की साढ़ेसाती शनि की ढैया से परेशान लोगों के लिए इस श्रावण मास में रुद्राभिषेक अति फलदाई सिद्ध होगा। 
शिव के अभिषेक की कथा प्राचीन: 
संतोषजी ने बताया कि श्रावण मास में भगवान शिव के अभिषेक करने की कथा बहुत प्राचीन है। जब देवता और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था तो सबसे पहले कालकूट विष निकला था। उस विष के भयंकर ताप से त्रिलोक जलने लगा। सभी की प्रार्थना पर भगवान शिव ने ही उस जहर का पान किया और कंठ से नीचे उतरने भी नहीं दिया। जिससे भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया और उन्हें नीलकंठ महादेव के नाम से जाना जाने लगा। कथाओं के आधार पर जब भगवान उस जहर को पिए तो शरीर बिल्कुल गर्म हो गया। भगवान को परेशान देख देवताओं ने गंगा जल से शिव जी को स्नान कराना शुरू कर दिया। वह महीना श्रावण का ही था। भगवान प्रसन्न होकर आशीर्वाद दिए कि जो भी इस महीने में हमारा अभिषेक करेगा उसे हम समस्त मनवांछित फल प्रदान करेंगे। तब से आज तक श्रावण मास में रुद्राभिषेक तथा शिवार्चन का विशेष  प्रचलन चला आ रहा है।
माता पार्वती ने सावन में रखा था व्रत: 
सावन सोमवार व्रत कथा का संबंध माता पार्वती से है ।माता सती ने जब महाराजा दक्ष के यहां अपना देह त्याग किया तो दूसरे जन्म में हिमाचल पुत्री पार्वती के रूप में जन्मी ।भगवान शिव को वर रूप में प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने श्रावण महीने में निराहार सोमवार व्रत किया। भगवान  शिव प्रसन्न होकर माता पार्वती को अपनी अर्धांगिनी बनाया।  वैसे अविवाहित बेटियां श्रावण सोमवार का जो व्रत रखती हैं उससे उन्हें भगवान जैसे पति की प्राप्ति होती है। अन्य माताएं बहने और भाई भगवत्प्राप्ति पुत्र धन संपदा सर्वत्र विजय प्राप्ति हेतु श्रावण मास में सोमवार व्रत रखते हैं।  संपूर्ण मनोकामनाओं की प्राप्ति हेतु  हो सके तो प्रतिदिन नहीं तो सावन के प्रत्येक सोमवार को दूध, दही, घी, शहद, पंचामृत, शक्कर, गंगाजल, केसर युक्त जल से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। बेलपत्र, भांग, धतूरा, मदार, शमी पत्र, अबीर गुलाल आदि पदार्थों से भगवान का श्रृंगार करना चाहिए। 

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  • Web Title:After years Savannah is made of a wonderful yog which is the grace of the chants