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बाबा के आस्ट्रेलिया जाने के 102 साल बाद पोती रायबरेली आई परिजनों से मिलने

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अपने गांव की मिट्टी की याद आते ही आस्ट्रेलिया से गांव पहुंची शांता कुमारी परिवारीजनों से मिली और उनके साथ एक घंटे खूब मौजमस्ती की। शांता के बाबा औसान वर्ष 1915 में अंग्रेजों के साथ आस्ट्रेलिया गन्ना की खेती करने के लिए गए थे। उसके बाद गांव नहीं लौटे और वहीं अपना आशियाना बना लिया।

औसान के पुत्र चांदिका प्रसाद की पुत्री शांता को अपने गांव और परिजनों की याद आई तो वह मंगलवार को अचानक ही शंकरपुर गांव पहुंच गई। परिवारीजनों से मिलकर खुशी का इजहार किया। शांता के एक पुत्र सिद्धांता व पुत्री दिव्या हैं। भाई सुनील कुमार वहीं आस्ट्रेलिया में रह कर ड्राइवरी का काम करता है। औसान के भाई पंचम शंकरपुर गांव में खेती किसान करते हैं। पंचम के पुत्र रामेश्वर गांव में दूध का धंधा करते हैं। शांता कुमारी के पति राजेश कुमार आस्ट्रेलिया में इंजीनियर हैं। शांता ने बताया कि दस साल पहले परिवारीजनों से मिलने की इच्छा जाहिर हुई थी, वह सपना आज पूरा हो गया। अपने गांव की मिट्टी से मिलकर व परिवारीजनों के साथ चाय की चुस्की ली। बच्चों व महिलाओं से मिलकर खुशी जाहिर की। 
इससे पहले थाना जगतपुर पहुंच कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस के साथ अपने गांव पहुंची शांता कुमारी एक घंटे का समय व्यतीत करने के बाद लखनऊ वापस चली गईं। 

 

 

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  • Web Title:After 102 years of Baba visit to Australia granddaughter RaeBareli came to meet the family
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