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प्रदेश में एसिड अटैक के 93.4 फीसदी केस अब तक लंबित

असोसिएशन फॉर एडवोकेसी एंड लीगल इनिशिएटिव्स (आली) की ओर से शुक्रवार को एसिड अटैक पीड़ितों को न्याय दिलाने व उनके अनुभव से जुड़े शोध का विमोचन गोमती नगर स्थित शीरोज हैंगआउट में किया गया।

विमोचन के दौरान आली की कार्यकारी निदेशक रेनू मिश्रा ने बताया कि पीड़ितों को न्याय दिलाने की कड़ी में बेहतर कार्यवाही की भूमिका अहम है। पुलिस अपनी पड़ताल में बेहतर तरीके से साक्ष्य इकट्ठा करे जिससे कोर्ट में केस को मजबूती मिले। कार्यक्रम में अपर निदेशक अभियोजन अधिकारी कुलशेखर सिंह ने बताया कि तेजाब पीड़ित मुआवजे के लिए अपने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को आवेदन भेज सकती है, इस योजना का ज्यादा से ज्यादा प्रचार करने की जरूरत है। कार्यक्रम में जस्टिस सुधीर सक्सेना, चेयरमैन स्टेट पब्लिक सर्विस ट्रिब्यूनल, एडीजी अंजू गुप्ता, कुलशेखर सिंह, अपर निदेशक अभियोजन अधिकारी, लखनऊ, छांव फाउंडेशन की प्रतिनिधि व आली की कार्यकारी निदेशक रेनू मिश्रा मौजूद रहीं।

शोध में छलका पीड़ितों का दर्द

कार्यक्रम में संस्था की ओर से दस जिलों में किए गए शोध के निष्कर्ष साझा किए गए। प्रदेश में 2016 के एसिड अटैक के 93.4 फीसदी केस अब तक लंबित हैं। शोध में ये बात भी सामने आई कि सामाजिक अपेक्षाओं से हटकर कार्य करने वाली महिलाएं अपराध की शिकार अधिक हुईं। ऐसे में अपराध सामाजिक रूप से 'दंड' देने के रूप में किया गया। राज्य अब तक इस अपराध को शारीरिक क्षति मान रहा है। राज्य की ओर से ऐसी औपचारिक कोर्ट की पहल नहीं हो पा रही है जिससे पीड़िता अपनी मानसिक क्षति से उबर पाए। जब तक पीड़िता मानसिक रूप से उस घटना से नहीं निकल पाएगी उसके लिए हर नया अवसर शून्य रहेगा।

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