86th All India Presiding Officers Conference to be Held in Lucknow on January 20-21 2026 20 व 21 जनवरी को लखनऊ में होगा पीठासीन अधिकारी सम्मेलन, Lucknow Hindi News - Hindustan
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20 व 21 जनवरी को लखनऊ में होगा पीठासीन अधिकारी सम्मेलन

Lucknow News - -विकसित उत्तर प्रदेश पर 193 सदस्यों ने की चर्चा - लखनऊ, विशेष संवाददाता

Newswrap हिन्दुस्तान, लखनऊMon, 18 Aug 2025 07:24 PM
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20 व 21 जनवरी को लखनऊ में होगा पीठासीन अधिकारी सम्मेलन

लखनऊ, विशेष संवाददाता विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा है कि अगले वर्ष 20 और 21 जनवरी 2026 को अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों का 86वाँ सम्मेलन लखनऊ में आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में देश भर की विधानसभाओं के अध्यक्ष भाग लेंगे और राज्यसभा के उपसभापति भी शामिल होंगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से इस आयोजन के लिए सहमति प्राप्त हो चुकी है। सतीश महाना सोमवार को पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन के माध्यम से उत्तर प्रदेश की प्रगति और विकास की झलक पूरे देश के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। वर्तमान में उत्तर प्रदेश देश की विधानसभाओं का नेतृत्व कर रहा है, जो अत्यंत गौरव का विषय है।

सम्मेलन की तैयारियां शीघ्र प्रारम्भ की जाएंगी। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा आउट ऑफ टर्न उत्तर प्रदेश को यह अवसर प्रदान किया जाना प्रदेश के लिए विशेष सम्मान की बात है। उन्होंने आगे कहा कि लोकसभा के संरक्षण में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन का विस्तृत कार्यक्रम, लोकसभा की टीम के आगमन के बाद तय किया जाएगा। सम्मेलन में सम्मिलित होने वाले सभी प्रतिनिधियों को प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक वैभव से परिचित कराने के लिए अयोध्या, काशी, मथुरा और कुशीनगर जैसे पावन स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष ने अवगत कराया कि इससे पूर्व यह सम्मेलन पटना और उससे पहले मुंबई में हुआ था। सम्मेलन के लिए प्रत्येक बार एक थीम निर्धारित की जाती है, जिस पर देश की सभी विधानसभाएं अपने विचार प्रस्तुत करती हैं। तत्पश्चात एक महत्त्वपूर्ण संकल्प पारित होता है और उसके कार्यान्वयन की जिम्मेदारी इस बार उत्तर प्रदेश को दी गई है। उन्होंने कहा कि देश की विधानसभाओं के विधायकों को प्रशिक्षण देने का उत्तरदायित्व भी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें सौंपा है। यह उत्तर प्रदेश के लिए न केवल सम्मान, बल्कि सौभाग्य की बात है। सतीश महाना ने कहा कि बीते सत्र के दौरान ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश की संकल्पना को और अधिक गहराई व व्यापकता प्रदान की गई है। इस मुद्दे पर बहस लगातार 28 घंटे तक भी चली। सतीश महाना ने बताया कि इस महत्त्वपूर्ण विषय पर सदन का प्रत्येक सदस्य विचार प्रकट करना चाहता था। इसमें भाग लेने की होड़ दिखाई दी। जिन्हें बोलने का अवसर मिला वे संतुष्ट दिखे, वहीं समयाभाववश जिनको अवसर नहीं मिल पाया, उनमें हल्का असंतोष झलकता रहा। कुल 193 सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया उन्होंने बताया कि इस चर्चा में 193 सदस्यों ने भाग लिया। इनमें भारतीय जनता पार्टी के 105 अपना दल के सात, राष्ट्रीय लोक दल के दो, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के दो, निर्बल इण्डियन शोषित हमारा आम दल के चार असम्बद्ध तीन, समाजवादी पार्टी के 65, कांग्रेस के दो, बसपा के एक और जनसत्ता दल के दो सदस्यों ने अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि कुल 193 सदस्यों में सत्तापक्ष के 120, विपक्ष के 70 और तीन असम्बद्ध सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी की। मंत्रिपरिषद के कुल 31 सदस्य भी इस विमर्श में शामिल हुए। इसके अतिरिक्त 24 महिला सदस्यों, जिनमें 18 सत्तापक्ष से और 6 विपक्ष से थीं ने भी उपस्थिति दर्ज कराई।

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