Lucknow News: आशियाना जैन मंदिर में बनेगा 24 तीर्थंकरों की प्रतिमा वाला 35 फुट ऊंचा मानस्तंभ
Lucknow News: आशियाना जैन मंदिर में 35 फुट ऊंचा मानस्तंभ बनेगा, जिसमें 24 तीर्थंकरों की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। भूमि पूजन का कार्य 30 अगस्त को होगा और इसे लगभग दो माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस धार्मिक समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।

Lucknow News: आशियाना जैन मंदिर में बनेगा 24 तीर्थंकरों की प्रतिमा वाला 35 फुट ऊंचा मानस्तंभ 30 अगस्त को होगा भूमि पूजन व शिलान्यस
निर्माण कार्य की अवधि
दो माह में निर्माण पूरा करने का रखा गया लक्ष्य
सामग्री व उपाय
साफेद संगमरमर से बनेगा मानस्तंभ
लखनऊ, संवाददाता।
आशियाना स्थित दिगंबर जैन मंदिर परिसर में अहंकार को तोड़ने, विनय व नम्रता का भाव जागृत करने का प्रतीक मानस्तंभ (मानस्थम) का भव्य निर्माण कराया जाएगा। 35 फुट ऊंचे इस मानस्तंभ में जैन धर्म के चौबीसों तीर्थंकर भगवानों की आकर्षक व दिव्य प्रतिमाएं चारो ओर स्थापित की जाएंगी। इस धार्मिक परियोजना को भूमि पूजन व शिलान्यास 30 अगस्त को होगा।
निर्माण की दिशा
आनंदमय वर्षायोग समिति के मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ जैन ने बताया कि 35 फुट ऊंचे और करीब 12 फुट व्यास का मानस्तंभ सफेद संगमरमर से बनाया जाएगा। उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज के सानिध्य में मानस्तंभ का निर्माण होगा। निर्माण कार्य को लगभग दो माह के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। मानस्तंभ के पूर्ण होने के बाद नवंबर 2026 में भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन होगा। जिसमें चौबीसों तीर्थंकर भगवानों की प्रतिमाओं की विधिवत प्रतिष्ठा होगी। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव जैन समाज के लिए एक बड़ा ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अवसर होगा। इस आयोजन में देशभर से श्रद्धालुओं, धर्मप्रेमियों व समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल होने की संभावना है।
मानस्तंभ का महत्व
मनुष्य के अहंकार को तोड़ता है मानस्तंभ
मानस्तंभ (मानस्थम) का शाब्दिक अर्थ है अहंकार को तोड़ने वाला स्तंभ। मानस्तंभ आमतौर पर जिनालय (जैन मंदिर) या मूलनायक वेदी के सामने स्थापित किया जाता है। मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ जैन ने बताया कि मंदिर जी में आते ही जब श्रद्धालु इस ऊंचे स्तंभ को देखता है तो उसे एहसास होता है भगवान के सामने कोई बड़ा या छोटा नहीं है। स्तंभ विनय और नम्रता का भाव जागृत करता है। यह आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक होता है। यह दर्शाता है कि मनुष्य अपने भीतर की शक्ति को पहचानकर महान बन सकता है। मानस्तंभ स्मरण कराता है कि मंदिर में प्रवेश करते समय अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या, लोभ को बाहर छोड़ कर आना चाहिए।


