मासूम के फेफड़े का जटिल ऑपरेशन कर दिया नया जीवन

Dec 15, 2025 08:03 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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Lucknow News - केजीएमयू के डॉक्टरों ने 11 महीने के विराट मौर्य की जान बचाई, जो बुखार, सांस फूलने और खांसी से परेशान था। बच्चे को वेंटिलेटर पर रखा गया था। जटिल सर्जरी के बाद, डॉक्टरों ने फेफड़े के खराब हिस्से को हटा दिया। अब बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी मिल गई है।

मासूम के फेफड़े का जटिल ऑपरेशन कर दिया नया जीवन

बुखार, सांस फूलने व लगातार खांसी से जूझ रहे 11 महीने के मासूम को केजीएमयू के डॉक्टरों ने नई जिंदगी दी है। समुचित इलाज के अभाव में बच्चा वेंटिलेटर तक पहुंच गया था। गंभीर अवस्था में परिवारीजन बच्चे को लेकर केजीएमयू पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने दूरबीन विधि से जटिल सर्जरी की। रायबरेली के सिक्काखेड़ा निवासी राम अचल मौर्य के 11 महीने के बच्चे विराट मौर्य को जन्म से ही सांस फूलने की समस्या थी। एक महीने पहले खांसी और तेज बुखार हुआ। इसकी वजह से उसकी सांस फूलने लगी। दूध पीने में भी दिक्कत होने लगी। परिवारीजन उसे रायबरेली के प्रमुख चिकित्सा संस्थान लेकर गए।

वहां बच्चे के आठ दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा। जांच करने पर डॉक्टरों ने फेफड़े में समस्या बताई। ऑपरेशन की जरूरत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे केजीएमयू रेफर कर दिया। केजीएमयू पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. जेडी रावत ने एक्सरे, एमआरई समेत दूसरी जांचें कराई, जिसमें बच्चे के बाएं फेफड़े में बीमारी की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी। तीन दिसंबर को दूरबीन विधि से बच्चे की सर्जरी की गई। इसके बाद वेंटिलेटर पर देखभाल बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. एसएन सिंह और डॉ.शालिनी त्रिपाठी के मार्गदर्शन में की गई। डॉ. रावत ने बताया कि ऑपरेशन तीन घंटे चला। इतने छोटे बच्चे की सर्जरी करना काफी चुनौतीपूर्ण था। जरा सी चूक से बच्चे की जान खतरे में पड़ सकती थी। ऑपरेशन कर फेफड़े के खराब हिस्से को निकाल दिया गया। बच्चे को तीन दिनों तक वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ है। सोमवार को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। ऑपरेशन करने वाली टीम पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. जेडी रावत, डॉ. गुरमीत सिंह, डॉ. कृति पटेल और डॉ. मनीष राजपूत सर्जरी में शामिल थे। एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. सतीश वर्मा ने संभाली। नर्सिंग स्टाफ में अंजू वर्मा, संजय और डॉली गौतम का अहम योगदान रहा। ऑपरेशन के बाद वेंटिलेटरी देखभाल बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. एसएन सिंह और डॉ. शालिनी त्रिपाठी के मार्गदर्शन में की गई।

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