संस्कृत भाषा भारतीय ज्ञान परम्परा का आधारसंस्कृत भाषा भारतीय ज्ञान परम्परा का आधार
Lucknow News - उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान ने 10 दिवसीय आवासीय संस्कृत संभाषण प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत की। इसमें विभिन्न राज्यों से प्रतिभागी संस्कृत के व्यवहारिक प्रशिक्षण में भाग ले रहे हैं। मुख्य अतिथि डॉ. प्रद्युम्न कुमार गुप्ता ने संस्कृत को भारतीय संस्कृति की आत्मा बताया और इसके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की ओर से दस दिवसीय आवासीय सरल संस्कृत संभाषण प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ मंगलवार से हुआ। जिसमें देश के विभिन्न जनपदों और राज्यों से आए प्रतिभागी संस्कृत भाषा के व्यवहारिक प्रशिक्षण में भाग ले रहे हैं। मुख्य अतिथि डॉ प्रद्युम्न कुमार गुप्ता ने कहा कि संस्कृत भाषा भारत की सांस्कृतिक आत्मा है और इसके संरक्षण तथा प्रसार के लिए ऐसे प्रशिक्षण शिविर अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल प्राचीन ग्रंथों की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा का आधार है, जिसे समाज में पुनः जीवंत करने की आवश्यकता है। संस्थान के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी दिनेश कुमार मिश्र ने कहा कि संस्कृत के माध्यम से भारतीय ज्ञान और संस्कारों का प्रसार होता है।
वहीं प्रशासनिक अधिकारी जगदानंद झा ने कहा कि संस्कृत भारतीय संस्कृति की आधारभूत भाषा है और इसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए ऐसे शिविर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। योजना प्रभारी भगवान सिंह चैहान ने बताया कि इस शिविर में प्रतिभागियों को सरल और व्यवहारिक पद्धति से संस्कृत बोलना सिखाया जाएगा। प्रशिक्षक धीरज मैठाणी, अनिल गौतम तथा प्रशिक्षिका राधा शर्मा एवं पूनम सिंह प्रतिभागियों को संवाद, गतिविधियों और समूह अभ्यास के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। इस शिविर में उत्तर प्रदेश के 20 से अधिक जनपदों के साथ-साथ उत्तराखंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागी शामिल हुए हैं।
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