साढ़े आठ घंटे 17 अधिकारियों से पूछताछ, इंजीनियरिंग पर उठे सवाल

हिन्दुस्तान, लखनऊ
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-दिल्ली से आई तीन सदस्यी जांच कमेटी ने दागे कई सवाल -कुछ ने बयान दर्ज साढ़े आठ घंटे 17 अधिकारियों से पूछताछ, इंजीनियरिंग पर उठे सवाल

साढ़े आठ घंटे 17 अधिकारियों से पूछताछ, इंजीनियरिंग पर उठे सवाल

चारबाग स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर पांच पर 29 मई को शेड गिरने के कारणों की जांच के लिए दिल्ली से तीन सदस्यीय जांच कमेटी बुधवार को लखनऊ पहुंची। एनआर डीआरएम कार्यालय के सभागार में घटना से जुड़े अधिकारियों के बयान दर्ज किए। 8.30 घंटे चली पूछताछ में 17 अधिकारियों को जांच टीम के सदस्यों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। सवालों में कुछ अधिकारी ऐसे उलझे कि उन्होंने जवाब देने के दौरान कई बार पानी मांगा। टीम अपनी रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को सौंपेगी। माना जा रहा है कि घटना की वजह लापरवाही और इंजीनियरिंग में चूक है। जोनल मुख्यालय बड़ौदा हाउस से प्रमुख मुख्य संरक्षा अधिकारी, प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक और प्रमुख मुख्य परिचालन प्रबंधक की तीन सदस्यीय टीम बुधवार सुबह लखनऊ पहुंची।

टीम ने सुबह 10 बजे डीआरएम कार्यालय के सभागार में पूछताछ शुरू की। इसमें आरएलडीए, स्टेशन प्रबंधन और आरपीएफ के अधिकारी शामिल रहे। बताते हैं कि 14 अधिकारियों के बयानों से टीम संतुष्ट नहीं हुई।लापरवाही और शेड की डिजाइन पर सवाल उठाएटीम ने लापरवाही, शेड की डिजाइन और इंजीनियरिंग पर सवाल उठाए। आरएलडीए के अधिकारियों से सवाल किया कि शुक्रवार को कार्य के लिए प्लेटफार्म नंबर पांच पर ब्लाक लिया गया था कि नहीं, इसका जवाब देने में अधिकारियों के पसीने छूट गए। तब मंडल के परिचालन अधिकारियों ने बताया कि पांच का तो नहीं, हां चार नंबर प्लेटफार्म का ब्लाक लिया गया था। इस लापरवाही पर टीम ने नाराजगी जताई। आरएलडीए के इंजीनियरों से शेड की डिजाइन को लेकर सवाल किए। पूछा क्या डिजाइन का प्रारूप गड़बड़ था। इसके लगाने के दौरान इंजीनियरिंग ठीक थी कि नहीं, इन सबका जवाब इंजीनियरों ने गोलमोल दिया, जिससे टीम असंतुष्ट रही।बीम को काटने के सवाल पर बचते रहे अधिकारीप्लेटफार्म नंबर पांच पर एक ही दिन पहले स्टील की एक बीम को कटर से काटे जाने का कारण जब जांच टीम ने पूछा तो इसका स्पष्ट जवाब आरएलडीए के अधिकारी नहीं दे पाए। प्लेटफार्म पर कार्य के लिए इंजीनियरिंग स्तर पर बैरेकेडिंग न कराए जाने के सवाल पर सहायक मंडल अभियंता ने बताया कि आरएलडीए और निर्माण कर रही कंपनी के प्रतिनिधियों ने काम कराए जाने की पूर्व में उन्हें कोई सूचना नहीं दी।मौके का मुआयना कियाटीम के सदस्यों ने इससे पहले की जांच में हादसे में गिरे प्लेटफार्म शेड की बीम, उसके काटे गए हिस्से और पिलर की मौजूदा स्थिति की पड़ताल की थी। शेड के बीम का स्ट्रक्चरल आडिट में पाया था कि कई स्थानों पर जंक लगे हैं। टीम ने कहा कि ऐसी स्थिति में इंजीनियरिंग विभाग को अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सचेत करना चाहिए था। कांफ्रेंस हाल में आरएलडीए के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर पावस यादव, इंजीनियरिंग, परिचालन और सिग्नल से जुडे कई अधिकारी शामिल हुए। घटना के समय प्लेटफार्म पर जाने वाले स्टेशन मास्टरों, आरपीएफ जवानों से टीम ने रिस्पांस सिस्टम को लेकर पूछताछ की।

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