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दारूल उलूम फरंगी महल में हज तरबियती कैम्प का आयोजन

- हज ट्रेनर शारिक अलवी ने बताया हज करने का सही तरीका - मौलाना खालिद रशीद ने देश में अमन शांति और उन्नति की दुआ करने की अपील कीलखनऊ। निज संवाददाता इस्लामिक सेंटर ऑफ इण्डिया फरंगी महल की ओर से दारूल उलूम फरंगी महल ईदगाह में ‘हज तरबियती कैप का आयोजन रविवार को किया गया। जिसका उद्घाटन इमाम ईदगाह व काजी-ए-शहर मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने किया। उन्होने कुरान करीम की आयतों और हदीसों के हवालों से खिताब करते हुए हाजियों को इस अहम फरीजे की आदायी के मुबारकबाद दी। उन्होने कहा कि वह लोग खुश किसमत हैं जो रहमान के मुकद्दस घर एक मेहमान की हैसियत से जा रहे हैं। हज इस्लाम की अजीमुश्शान इमारत के पांच स्तम्भों में से एक स्तम्भ है। इस इमारत के बाकी स्तम्भ तौहीद, नमाज, रोजा और जकात हैं। इस्लामी शरीअत में हज उस बन्दे पर उसकी पूरी जिन्दगी में एक बार फर्ज होता है जो मक्का पहुंचने की हैसियत रखता हो। ट्रेनर ने बताया हज करने का सही तरीका कैंप में मौजूद सैकड़ो हज यात्रियों को हज ट्रेनर शारिक अलवी ने हज कैसे करें व उसका सही तरीका क्या है उसके बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हज में कदम कदम पर सवाब मिलता है। काबे में हर रोज 120 रहमतें नाजिल होती हैं। मकाम इब्राहीम, हजर असवद, सफा व मरवा और चाह जमजम ऐसी जगहें हैं जहां बेहिसाब रहमतें नाजिल होती रहती हैं। काबा शरीफ में एक नमाज पढ़ने का सवाब एक लाख नमाजों के बराबर मिलता है। मस्जिद नबवी सल्ल. में एक नमाज पढ़ने का सवाब पचास हजार नमाजों के बराबर मिलता है। मस्जिद-ए-हराम और मस्जिद नबवी सल्ल. में अधिक से अधिक समय गुजारें। अपने आप को इबादत में मशगूल रखें। कैंप का संचालन मौलाना मुहम्मद मुश्ताक ने किया। इस मौके पर कारी कमरूद्दीन निजामी, कबीर अहमद, रेहान हाशमी समेत कई लोग मौजूद रहे।

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