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किसी जाति और धर्म नहीं संविधान की बात करती है फिल्म

हिन्दुस्तान टीम,लखनऊNewswrap
Sun, 30 Jun 2019 07:44 PM
किसी जाति और धर्म नहीं संविधान की बात करती है फिल्म

- आर्टिकल 15 मूवी को लेकर कानपुर से लेकर पटना तक हो रहा विरोध - फिल्म में काम करने वाले लोकल कलाकारों ने विरोध को बताया बेबुनियाद लखनऊ। निज संवाददाता सविधान के आर्टिकल 15 को लेकर अनुभव सिन्हा की फिल्म का विरोध बढ़ता ही जा रहा है। कानपुर से लेकर पटना तक एक विशेष जाति को गलत दिखाने को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। पटना में तो फिल्म के विरोध के कारण कई शो स्थगित करने पड़े। जातिवाद जैसे सामाजिक मुददे को लेकर बनी आर्टिकल 15 की शूटिंग लखनऊ व उसके आस पास के क्षेत्रों में की गई। आष्युमान खुराना अभिनीत फिल्म में शहर के कई वरिष्ठ व युवा कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई है।जाति नहीं मानसिकता को दिखाया गया फिल्म में कास्टिंग डायरेक्टर और एक्टर के रूप में काम करने वाले विवेक यादव ने कहा कि शुरु में जब विरोध हुआ था तो ब्राह्मण संगठन को स्पेशल स्क्रीनिंग करके फिल्म दिखाई गई थी उसके बाद संगठन की ओर से क्लीन चिट दे दी गई थी। उसके बाद भी विरोध प्रदर्शन हो रहा है। फिल्म में सिस्टम और लोगों की मानसिकता को दिखाया गया न कि किसी विशेष समुदाय के बारे में दिखाया गया। मुल्क के बाद अभिनव सिन्हा के साथ दूबारा काम कर रहे है उनके साथ काम करने में कांसेप्ट बहुत क्लियर रहता है। पहली बार मैंने कास्टिंग डायरेक्टर के साथ अभिनय भी किया है। जिशान अय्यूब जिन्होंने निषाद का किरदार निभाया है मैंने उनके दोस्त का किरदार निभाया है। पब्लिसिटी के लिए कर रहे है विरोधआर्टिकल 15 में सुक्खा सिंह का किरदार निभा रहे अभिनेता उदयवीर ने कहा कि जो लोग फिल्म का विरोध कर है उनको सबसे पहले फिल्म देखनी चाहिए अगर उसके बाद भी लगता है कि एक खास जाति को नीचा दिखाने के लिए फिल्म बनी है तो कोर्ट में अपील करे। संजय लीला भंसाली की फिल्म को पदमावत को लेकर विरोध करने वालों को काफी पब्लिसिटी मिली। अब लोग बिना जाने और देखे ही अपनी पब्लिसिटी के लिए विरोध प्रदर्शन करने लगते है। फिल्म में ऐसा कुछ भी नहीं दिखाया गया है। फिल्म सामाजिक मुददे पर बनी हैआर्टिकल 15 में महंत का किरदार निभाने वाले नवल किशोर ने कहा कि मेरी समझ में यह नहीं आता कि लोग बिना किसी बात के विरोध क्यों करने लगते है। यह किसी जाति या समुदाय विशेष को लेकर फिल्म नहीं बनाई गई है। यह एक सामाजिक मुददे को लेकर बनाई गई है। जो समस्या दिखाई गई वो आज भी है। सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं कई प्रदेशों में भी यहीं समस्या है। अभिनव सिन्हा ने जिस मुददे को उठाया है उसके बारे में लोगों को सोचना चाहिए बेवजह विरोध करके अपनी छवि को और खराब नहीं करना चाहिए। सिर्फ सविधान की बात करती है फिल्म फिल्म में विक्टिम लड़की के पिता ननकाऊ का किरदार निभा रहे जिया अहमद ने कहा कि हमारा देश सविधान से चलता है और चलना भी चाहिए। सविधान का अनुपालन करवाना कार्य पालिका की जिम्मेदारी है। यह फिल्म सिर्फ और सिर्फ सविधान के सामनता के अधिकार की बात करती है। किसी जाति धर्म और समुदाय विशेष की बात नहीं करती। इसलिए फिल्म का विरोध करना गलत है। हम लोगों को कभी सेट पर नहीं कहा गया कि तुम नीच जाति का किरदार निभा रहे हो हमेशा सिर्फ किरदार के बारे में बताया गया बस। क्या है आर्टिकल 15 भारतीय संविधान में 25 भागों और 12 अनुसूचियों में 449 अनुच्छेद (आर्टिकल) शामिल हैं। जिसमें आर्टिकल 15 सामनता का अधिकार देता है। जो बताता है कि किसी भी भारतीय नागरिक से उसके धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म-स्थान के आधार पर भेद-भाव नहीं किया जाएगा। सरकार और समाज की ये जिम्मेदारी है कि वो ऐसा कोई भेदभाव होने न दे। इसके अलावा किसी नागरिक को केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर किसी दुकान, सार्वजनिक भोजनालय, होटल और सार्वजनिक मनोरंजन के स्थानों जैसे सिनेमा और थियेटर आदि जगहों में प्रवेश से नहीं रोका जा सकता है। इसके अलावा सरकारी या अर्ध-सरकारी कुओं, तालाबों, स्नाघाटों, सड़कों और पब्लिक प्लेस के इस्तेमाल से भी किसी को इस आधार पर नहीं रोक सकते हैं।

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