- महिला प्रतिरोध के आगे हारा पुरुपवादी अहंकार DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

महिला प्रतिरोध के आगे हारा पुरुपवादी अहंकार

- एनएसडी रेपर्टरी और बीएनए की ओर से ग्रीष्मकालीन नाट्य समारोह का हुआ समापन - अंतिम दिन गजब तेरी अदा नाटक का हुआ मंचन लखनऊ। निज संवाददाता युद्ध विभाषिका, महिला अत्याचार और शोषण के विरूद्ध महिलाओं के अहिंसात्मक प्रतिरोध के आगे चकनाचूर होते पुरुषवादी अहंकार को देखकर हर कोई रोमांचित हो गया। एनएसडी रेपर्टरी और भारतेंदु नाट्य अकादमी की ओर से आयोजित छह दिवसीय समर थियेटर फेस्टिवल का शुक्रवार को समापन हो गया। अंतिम दिन प्रो. वामन केंद्रे के लिखे व निर्देशित नाटक गजब तेरी अदा का मंचन किया गया। जिसमें युद्ध की विभीषिका के चलते महिला अत्याचार के विरूद्ध महिलाओं के आंदोलन ने महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल पेश की। जब महिलाओं ने उठाई आवाज नाटक गजब तेरी अदा का आगाज सौंवे युद्ध पर जाते हुए सैनिकों के अभिनंदन से होता है जिसमें पूरा शहर उनके हौसले व बहादुरी की तारीफ करता हुआ उनको विदा करता है। युद्ध में जाने के बाद महीनों तक जब सैनिकों की कोई खबर नहीं मिलती है तो राजा अपने प्रधान से जानकारी लेता है। इसी बीच दूत विजय की खबर लेकर आता है सारे सैनिक हजारों महिलाओं को बंदी बनाकर लाते है। दुश्मन देश की स्त्रियों की दुर्दशा देखकर वहां की महिलाओं का मन ग्लानि व भय से भर जाता है वो युद्ध की विभीषिका को रोकने के लिए अहिंसात्मक आंदोलन करती है जिसमें लाया नाम की स्त्री के नेतृत्व में सारी महिलाएं निर्णय लेती है जब तक युद्ध बंद नहीं होता तब वो अपने शरीर को हाथ नहीं लगाने देगी। शुरु में पुरुषों को यह प्रतिरोध मजाक लगता है मगर कुछ समय बाद पुरुषवादी अंहकार टकराता है और वो इस प्रतिरोध को अपने बल से दबाने की नाकाम कोशिश करते है। अंत में महारानी भी इस आंदोलन में शामिल हो जाती है। इस अनोखे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के आगे हिंसा पंसद राजा व सैनिक अपने हाथियार डालने को मजबूर हो जाते है। नाटक में दीप कुमार, शाहनवाज, बोरनाली बोरा, सोनल, शिल्पा आदि ने अभिनय किया।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: