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उत्पीड़न और रिश्वतखोरी की शिकायत मुख्यमंत्री से

मुख्यमंत्री कार्यालय ने लिया संज्ञान, दो-तीन दिन में वार्ता के लिए बुलायामामले का जल्द समाधान या सड़क पर आन्दोलन की धमकीलखनऊ वरिष्ठ संवाददातापशुपालन विभाग के कर्मचारियों ने लखनऊ और आजमगढ़ के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारियों पर उत्पीड़न और रिश्वतखोरी का आरोप लगाया है। उत्तर प्रदेश पशु चिकित्सा संघ ने भी इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से करके जांच की मांग की है। वहीं कर्मचारियों ने यह मामला पशुपालन प्रशासन एवं विकास के निदेशक के सामने रखा है। मुख्यमंत्री से शिकायत जांच की मांगलखनऊ और आजमगढ़ के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश पशु चिकित्सा संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन के अध्यक्ष डॉ. सुधीर कुमार ने कहा कि लखनऊ के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. तेज सिंह यादव अपने अधीनस्थ चिकित्सकों का उत्पीड़न कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरोजनीनगर के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुणेन्द्र कुमार सचान का इतना उत्पीड़न किया गया कि उन्हें कार्यालय में ही दिल का दौरा पड़ गया। वहीं बिना किसी ठोस आधार के उनको 2016-17 में प्रतिकूल प्रविष्टि दे दी। इसके बाद उनका उत्पीड़न नहीं रुका और 2018-19 में वार्षिक चरित्र प्रविष्टि भी प्रतिकूल दर्ज करा दी गई। इसके साथ ही आजमगढ़ के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने तहबरपुर के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. दृगपाल सिंह का आठ माह का बकाया वेतन एवं वेतन निर्धारण एरियर बिना किसी कारण के रोक रखा है। डॉ. दृगपाल सिंह का आरोप है कि उनसे वेतन बकाया भुगतान के लिए रिश्वत मांगी जा रही है। आन्दोलन की धमकीउ.प्र. पशु चिकित्सा संघ ने पूरे मामले पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विभागीय अधिकारियों को अवगत कराकर मामले की जांच की मांग की है। संगठन के अध्यक्ष डॉ. सुधीर कुमार और महामंत्री डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय से इस पूरे मामले पर दो-तीन दिन में वार्ता करने का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले का जल्दी ही समाधान नहीं किया गया तो संगठन इसको लेकर सड़क पर संघर्ष करने के मजबूर हो जाएगा।

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