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जातिवाद पर के दंश को दिखाती है तर्पण

- राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में मिल चुके है 28 अवार्डस - जातिवाद पर बनी फिल्म में दिखाई गई संविधान की ताकत लखनऊ। निज संवाददाता आजादी के इतने सालों बाद भी समाज में जातिवाद का मुददा हावी है। जब तक जातिवाद खत्म नहीं होगा तब तक देश आगे नहीं बढ़ पाएगा। इसके लिए शिक्षित बनने के साथ संगठित होने की जरूरत है। यह फिल्म इसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ है। यह बातें फिल्म की निर्देशक व निर्माता नीलम आर सिंह ने कही। सोमवार को एक होटल में फिल्म तर्पण का ट्रेलर लांच किया गया। इस दौरान फिल्म के कलाकार नंद किशोर पंत, शक्ति मिश्रा, राहुल चौहान, आकाश आनंद अरूण शेखर समेत कई लोग मौजूद रहे। शिवमूर्ति के नॉवेल तर्पण पर आधारित निर्देशक नीलम आर सिंह ने बताया कि साहित्यकार शिवमूर्ति के नॉवेल तर्पण पर फिल्म बनाई गई है। जो समाज के दलित और प्रताडित समुदाय के संगठित प्रतिरोध और परिवर्तन की कहानी है। जातिवाद के मुददे को इस फिल्म में मुखरता से उठाया गया है। यहीं कारण है कि सेंसर बोर्ड की ओर से करीब छह महीने से फिल्म को सार्टिफिकेट नहीं दिया गया है। उसके बावजूद राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय समेत कई फिल्म फेस्टिवल में यह फिल्म अब तक 28 अवार्ड पा चुकी है। उन्होंने सेंसर बोर्ड विवाद के बारे में बताते हुए कहा कि सेंसर बोर्ड जातिवाद के मुददे पर बनी इस फिल्म को ए सर्टिफिकेट दे रहा है जबकि हमारा मानना है जो समाज की हकीकत है उसके बारे में सबको पता होना चाहिए इसलिए हम इसे यू ए सार्टिफिकेट देने की मांग कर रहे है। अगले हफ्ते इस मामले पर फिर सुनवाई होगी। तर्पण फिल्म के जरिये हम जातिवाद शब्द व समस्या को तर्पण करने का संदेश दे रहे है।

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