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चंद्रशेखर आजाद के उददेश्यों को जीवन में उतारे छात्र

- शैक्षिक प्रतियोगिता के विजेताओं को किया गया पुरस्कृत

लखनऊ। निज संवाददाता

आज के समय में अपने अंदर चंद्रशेखर के विचारों को अपनाने की जरूरत है। जो समाज में भ्रष्टाचार कर रहे है उनको समाज के सामने आइना दिखाने की जरूरत है। यह बातें भोपाल परिसर के पूर्व प्राचार्य आजाद मिश्र ने कही। सोमवार को राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान मानित विश्वविद्यालय का 25वां वार्षिकोत्सव संस्थान परिसर में मनाया गया। जिसका शुभारंभ दीप प्रज्जवलन व मां भारती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व पप्राचार्य प्रो. गयाचरण त्रिपाठी मौजूद रहे। समारोह में संस्कृत विद्वानों ने छात्र-छात्राओं को जीवन मूल्यों और उच्च आदर्शों को अपनाते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। समारोह में वार्षिक खेलकूद और शैक्षिक प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। उप प्राचार्य लोकमान्य मिश्र ने संस्थान की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि पूर्व प्राचार्य प्रो गयाचरण त्रिपाठी ने व्याख्यान देते हुए छात्र-छात्राओं को प्रेरणा दी। भोपाल परिसर के पूर्व प्राचार्य प्रो आजाद मिश्र ने अमर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के जीवन संघर्ष के बारे में बताया। संस्थान के प्राचार्य प्रो विजय कुमार जैन ने छात्रों को गुरु शिष्य परंपरा को निभाने और उसके अध्ययन करने की बात कही। उन्होंने छात्रों से स्वच्छता के प्रति सजग रहने की अपील की।

इनको मिला पुरस्कार

राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के वार्षिकोत्सव में शैक्षिक व खेलकूद प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। जिसमें हरिओम शुक्ल को अखिल भारतीय पुरस्कार, विभा मिश्रा व प्रगति को परिसर गौरव पुरस्कार, रजनीत गौड़ और मीनाक्षी नेगी को सर्वोत्म क्रीडक पुरस्कार प्रदान किया गया। प्रो भारतभूषण त्रिपाठी के संचालन में हुए कार्यक्रम में गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर परिकर के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर शोक जताया। राष्ट्रगान गाकर समारोह का समापन हुआ।

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