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होरी गयी यदि कोरी हमारी, फागुन गांव में आने ना दूंगी...

- अवधी फागोत्सव के ग्यारहवें दिन रंगे बिरंगे गीतों से सजी अवध की शामलखनऊ। निज संवाददाता मिलन का त्योहार होरी है, ऋतु बसन्त है, पिया विदेस हैं, समेत होरी गीतों से शाम गुलजार हुई। मौका था अवधी फागोत्सव के अन्तर्गत चल रही संगीत बैठकी का। रविवार को लोक संस्कृति शोध संस्थान द्वारा ग्यारहवें दिन की होली बैठकी अपर पुलिस महानिदेशक असित कुमार पाण्डा के पुलिस इन्कलेव स्थित आवास पर हुई जहां पर लोगों ने जमकर फाग गीत गाए। रंग डारो न कार्यक्रम की शुरुआत आरती पाण्डेय ने गणेश वन्दना से की। सुमन पाण्डा ने 'होरी गयी यदि कोरी हमारी, फागुन गांव में आने ना दूंगी' गाया तो वरिष्ठ संगीतकार केवल कुमार ने 'रंग डारो न', एसएनए के पूर्व अध्यक्ष अच्छेलाल सोनी ने 'जोगीरा सर रररर', युगल गायिका यामिनी-कामिनी ने 'बाबा काशी विश्वनाथ गौरा संग खेलत होली' गाकर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। बैठकी में उमा त्रिगुणायत, पुष्पलता अग्रवाल, सर्वेश माथुर, सौरभ कमल, भावना शुक्ला, गौरव गुप्ता, एस.पी.साहू, भारती श्रीवास्तव, सुषमा अग्रवाल, डा. विनीता सिंह, संगीता खरे, जयप्रकाश कुलश्रेष्ठ आदि ने पारम्परिक फाग गाकर एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव सुधा द्विवेदी ने बताया कि लुप्त हो रही होली बैठकी की परम्परा को आगे बढ़ाने की दृष्टि से संस्थान द्वारा अवधी फागोत्सव के अन्तर्गत दस दिनों से प्रतिदिन बैठकी की जा रही है। सोमवार को जानकीपुरम 19 मार्च को सुशान्त गोल्फ सिटी व 20 मार्च को राजाजीपुरम में होली की बैठकी होगी तथा इसका समापन शीतलाष्टमी को अर्जुनगंज में किया जायेगा।

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