DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अब नायक का रूप बदल गया है

- कुंवरपाल सिंह स्मृति व्याख्यान में इस समय में लेखक होना विषय पर वक्ताओं ने रखे विचार - केपी सिंह मेमोरियल चैरीटेबल टस्ट की ओर से हुआ आयोजन लखनऊ। निज संवाददाता मैं नेहरू युग में पला-बढ़ा और मुझे सेक्युलर संस्कार भी उसी दौर में मिला। लेकिन अब हम लोग नेहरू युग के अंतिम अवशेष हैं। अब समय बदल रहा है। अब नायक का रूप बदल गया है। बाजार ने तमाम संदर्भ बदल दिए हैं। यह बातें वरिष्ठ कवि विष्णु नागर ने कुंवरपाल सिंह स्मृति व्याख्यान विषय 'इस समय में लेखक होना' पर बोलते हुए कही। उन्होंने कहा कि लेखक पर जिम्मेदारी बहुत है लेकिन लेखक की आवाज सबसे कमजोर मानी जाती है। लेकिन हमारी सामूहिक ताकत बड़ी मानी जाती है। उन्होंने कहा कि इस समय में लेखक होने पर जरूरी है कि लेखक लेखन से बाहर भी भूमिका निभाएं। केपी मेमोरियल चैरीटेबल ट्रस्ट की ओर से कैफी आजमी अकादमी के सभागार में हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना ने की। अपने कर्तव्य पूरा करे लेखक कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नरेश सक्सेना ने कहा कि आज जो सवाल उठाये गए वे बेहद महत्वपूर्ण हैं। समय कठिन है लेकिन अपेक्षा है कि लेखक झूठ के खिलाफ सड़क पर निकलें। लेखकों जो कर्तव्य है वह पूरा करें। लेखक कभी अपने विचार की हत्या नहीं कर सकते। लेखकों को जोखिम लेना पड़ेगा। इससे पहले जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष नलिन रंजन सिंह ने कहा कि जिस दौर में लेखकों की हत्या हो रही हो, जिस दौर में लिखने वालों को जीते जी अपने लेखकीय व्यक्तित्व के मृत्य की घोषणा करनी पड़ जाय, उस दौर में लेखक होना कठिन काम है। इस मौके पर आगरा के प्रो.रामवीर सिंह ने कुंवरपाल सिंह के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन कवि ज्ञानप्रकाश चौबे ने किया। व्याख्यान के बाद सवाल-जवाब का भी सत्र हुआ। इस अवसर पर रवीन्द्र वर्मा, शीला रोहेकर, वीरेन्द्र यादव, अखिलेश, देवेन्द्र, राकेश, रमेश दीक्षित, विजय राय, नदीम हसनैन, अनिल त्रिपाठी, सुभाष राय, सी.पी.राय, दयानंद पाण्डेय,कात्यायनी, आभा खरे, संध्या सिंह, माधवी मिश्रा, कल्पना पाण्डेय आदि साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: