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लोक संस्कृति पुस्तकालय में लोक साहित्य

लखनऊ। निज संवाददाता देश, प्रदेश की विलुप्त होती लोक कलाओं व साहित्य को सुरक्षित रखने के उददेश्य से व नई पीढ़ी से अपनी लोक संस्कृति से रूबरू करवाने के लिए सोमवार से जानकीपुरम में लोक संस्कृति पुस्तकालय की स्थापना की गई। अवधी, ब्रज, बुन्देली, भोजपुरी, कौरवी, कुमाऊंनी, गढ़वाली आदि स्थानीय भाषा व क्षेत्र के लोक साहित्य के साथ पुस्तकालय में क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्य, पत्र-पत्रिकाएं, नागरिक उपयोगी पुस्तकें व पाण्डुलिपियां संकलित की गयी हैं। लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव सुधा द्विवेदी ने बताया कि लोक भाषा की कृतियां हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं जो शोधार्थियों व जनसामान्य को आसानी से सुलभ नहीं होती। इसी कमी को दूर करने की दिशा में एक पहल की गई है। जल्द पुस्तकालय के स्वरुप को विस्तार देने के साथ इसमें भाषावार अलग अलग खण्ड स्थापित होंगे। उन्होंने लोक गायकों व कलाकारों से कजरी, बिरहा, आल्हा, संस्कार गीत, मेला गीत, ऋतु गीत, खेती किसानी के गीतों सहित लोक नाट्य नौटंकी व विविध लोक नृत्यों से सम्बन्धित पुस्तकें अथवा पाण्डुलिपियां संस्थान को उपलब्ध कराने व पुस्तक दान करने की अपील की। इस अवसर पर प्रख्यात अवधी साहित्यकार डॉ. रामबहादुर मिश्र ने पांच हजार मूल्य की पुस्तकें पुस्तकालय को दान कीं।

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