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कामकाजी ज‍िराफ के ल‍िए व‍िछा मखमली कालीन

नवाब वाजिद अलि शाह प्राणि उद्यान में जिराफ सुजाता के पैरों को आराम देने के लिए बाड़े में बालू की मोटी परत बिछवाई गई है ताकि उसके पैरों को आराम मिल सके। पशुचिकित्सक अशोक कश्यप ने बताया कि लगातार चलते रहने से सुजाता के पैरों में सूजन या कोई समस्या न हो इसलिए उसके बाड़े के एक तरफ बालू की परत बिछवाई है। जिराफ का औसतन वजन 120 किलो होता है ऐसे में लगातार चलते रहने से उनके पैर पर भार आ जाता है, बालू पर चलने से जिराफ के पैरों की थकन न सिर्फ कम होगी बल्कि उसे घास में कुछ चुभने का डर भी नहीं रहेगा। बालू को छानकर जिराफ के बाड़े में डाला गया है। जिराफ को मुलायम बालू पर चलकर अपने पैरों को आराम देने का विकल्प पसंद भी आया है।

पतले पैरों से जिराफ संभालता है भारी वजन

जिराफ के पैरों में स्नायु होता है। जिराफ के शरीर में उसके पैर उसे बाकि प्राणियों से अलग बनाते हैं। जिराफ के पैरों की हड्डियों में यांत्रिक तनाव का स्तर बहुत ज्यादा होता है। इंसानों की हाथ-पैर की हड्डियों के मुकाबले जिराफ की हड्डियां बड़ी होती हैं। जिराफ की हड्डियां में सस्पेंसरी स्नायु लगा होता है। इसी प्रकार की संरचना घोड़े में भी पाई जाती है, जिस कारण वो तेज दौड़ पाता है। स्नायु हड्डियों में पाया जाने वाला लचीला पदार्थ है, जिससे जिराफ अधिक वजन सह पाता है और जल्दी थकता नहीं है।

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