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जनवरी से लागू हो जाएगी मुख्यमंत्री सुपोषण घर योजना

मुख्यमंत्री सुपोषण घर (एमएसजी) में शतप्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए राज्य सरकार प्रोत्साहन भत्ता देगी। योजना जनवरी 2019 से मार्च 2020 तक चलाई जाएगी। फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाया जाएगा। इस संबंध में राज्य पोषण मिशन की महानिदेशक मोनिका एस गर्ग ने आदेश जारी कर दिया है।

‘मुख्यमंत्री सुपोषण घर योजना 10 जिलों के 28 ब्लॉक मुख्यालयों पर चलेगी। अति पिछड़ा घोषित बहराइच, बलरामपुर, चंदौली, सोनभद्र, सिद्धार्थनगर, फतेहपुर, श्रावस्ती व चित्रकूट के अलावा कुपोषण की समस्या से जूझ रहे सीतापुर व गोंडा में भी योजना चलाई जाएगी।

इसके लिए स्वास्थ्य विभाग सीएचसी या पीएचसी पर एक कमरा अलग से उपलब्ध कराएगा। इनमें छह-छह बेड डाले जाएंगे और यहां नर्स, परामर्शदाता और अन्य कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। डिस्चार्ज होने के बाद ऐसे बच्चों का फॉलोअप किया जाएगा। ऐसे बच्चों की पहचान के लक्षण भी तय कर दिए गए हैं। गंभीर कुपोषित बच्चों को यहां रखा जाएगा और उनका उपचार होगा। डिस्चार्ज के बाद 2 महीने तक हर 15 दिन पर फॉलोअप किया जाएगा।

बच्चे के डिस्चार्ज के मानक भी तय कर दिए गए हैं। वहीं माताओं को कम लागत वाली पोषणयुक्त भोजन की विधियां भी सिखाई जाएंगी।

मिलेगा इंसेंटिव

सात या इससे कम बेड भरे होने पर चिकित्साधिकारी को 1500 रुपये, 8 से 9 बेड भरने पर 2000 रुपये और 9 से अधिक भरे होने पर 3000 रुपये दिए जाएंगे।

पोषण परामर्शदाता व स्टाफ़ नर्स को 4200 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। वहीं कुपोषित बच्चे के चार फॉलोअप पूरा करने पर मुख्य सेविका को 200 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। प्रतिमाह 5 केंद्रों के भ्रमण और समूह बैठक करने पर 400 रुपये मिलने। आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री को कुपोषित बच्चों की रेफरल सूची सुपरवाइजर को सौंपी जाएगी जिसके लिए प्रति बच्चा 50 रुपये प्रोतसाहन राशि तय की गई है। इस योजना की नियमित मॉनिटरिंग होगी और वेबसाइट पर सारी रिपोटर्स को अपलोड करना होगा

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