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जय-जय जगत जननी देवी

- आईसीसीआर व एसएनए की ओर से क्षितिज श्रंखला के तहत कथक नृत्य का आयोजन - वाल्मिकी प्रेक्षागृह में एमेली घोष के नृत्य ने बांधा समां लखनऊ। निज संवाददाता ठुमरी, भजन, तीन ताल धमार में कथक के रंग देखकर हर कोई आनंदित हो गया। शुक्रवार को कथक नृत्यांगना एमेली घोष के कथक नृत्य ने ऐसा समां बांधा कि हर कोई उनके रंग में सराबोर हो गया। भारतीय सांस्कृति सम्बंध परिषद व एसएनए की ओर से क्षितिज श्रंखला के तहत संगीत नाटक अकादमी में कथक नृत्य का आयोजन किया गया। जिसमें जानी मानी कथक नृत्यांगना ने अपने नृत्य से खूब वाहवाही लूटी। मंच संचालन वंदना शुक्ला ने किया। डगर चलत देखो श्याम कथक नृत्यांगना एमेली घोष ने अपनी नृत्य सरंचनाओं से लोगों को आनंदित कर दिया। कार्यक्रम का आगाज एमेली घोष ने मातृ वंदना जय-जय जगत जननी देवी…से की। जिससे पूरा वातावरण भक्ति के रंग में सराबोर हो गया। जिसमें तीन ताल में ढली रचना में उन्होंने मां सरस्वती, मां दुर्गा और काली के विभिन्न रुपों को पेश किया। इसके बाद मनमोहक ठुमरी और भजन पर नृत्य कर लोगों को आनंदित कर दिया। उन्होंने भजन प्रगटे बृज नंदलाला…, ठुमरी डगर चलत देखो श्याम… पर कथक सरंचना से खूब प्रभावित किया। उनके साथ संगत पर गायन में सुभाशीष भट्रटाचार्या, सितार पर संदीप नियोगी और तबला पर पंडित परिमल चक्रवर्ती ने शानदार संगत की।

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