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इंतजार करती रही मानसिक विकलांग युवतियां

-चार घंटे तक नहीं खोले निर्वाण संस्था ने दरवाजे

लखनऊ। निज संवाददाता

लीलावती मुंशी बालगृह में पिछले सात सालों से रह रही मानसिक रूप से अपंग युवतियों को सहारा नहीं मिल रहा है। हाथ बढ़ाने वाली संस्थाओं ने अपनी जिम्मेदारी से हाथ खींच लिए हैं और उनके लिए ही बने आसरे के दरवाजों को उनके लिए बंद कर दिया है ऐसे में वो लीलावती मुंशी बालगृह की इंचार्ज शिल्पी सक्सेना अपंग युवतियों के साथ पांच घंटे तक निर्वाण संस्था के सामने खड़ी रही। लीलावती मुंशी बालगृह की इंचार्ज शिल्पी सक्सेना ने बताया कि इन दोनों लड़कियों को सात साल पहले बालगृह में लाया गया था। एक लड़की की उम्र छह साल तो वहीं दूसरी की 13 साल उम्र है दोनों ही लड़कियों को सीपी की बीमारी है इस बीमारी के कारण वो मानसिक और शारिरीक रुप से असक्षम हैं जिसके कारण उनको उनकी उम्र बढ़ने के कारण साधारण बच्चों के साथ नहीं रखा जा सकता है। ऐसे में उनके स्थान्तरण के संबंध में उनको निर्वाण संस्था लेकर आई हूं। पिछले एक हफ्ते से रोज दोनों युवतियों को लेकर आ रही हूं पर संस्था के दरवाजे बंद हैं संपर्क करने पर कोई न फोन उठा रहा है न कोई कुछ बता रहा है। ऐसे में बुधवार को मैं दोनों के साथ यहां पहुची पर हालात जस के तस ही हैं पांच घंटो तक दोनों के साथ सड़क पर खड़ी रही।

-अमानवीय घटना है ये

चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की मेम्बर डॉ संगीता शर्मा ने इस मामले में कहा कि सारी चीजें कानून के अनुसार होनी चाहिए और जेजे एक्ट 2015 के अनुसार मानसिक और शरिरीक तौर पर विक्षिप्त बच्चों को सुरक्षित स्थान पर रखना जरुरी है इसलिए निर्वाण संस्था को यह जिम्मा मिला पर उनके द्वारा कि गई हरकत अमानवीय है। वहीं जब निर्वाण संस्था के इंचार्ज एसके ढ़पोला को फोन मिलाने के बाद उनका फोन नहीं उठा।

इन संस्थाओं को भावनात्मक रुप से काम करना चाहिए । ऐसे रवैये से समाज में नकारात्मकता बढ़ती है।

कुलदीप रंजन,अध्यक्ष, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी

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