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बलरामपुर अस्पताल के निदेशक ने हाईकोर्ट में मांगी माफी

हाईकोर्ट ने आज्ञा के उल्लंघन पर मांगा था स्पष्टीकरणविधि संवाददातालखनऊ। बलरामपुर अस्पताल के डायरेक्टर/सुपरिंटेंडेंट ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के समक्ष बिना शर्त माफी मांगी है। न्यायालय ने बुधवार को शासनादेश का सहारा लेते हुए, कोर्ट के आदेश का अनुपालन न करने पर उनसे स्पष्टीकरण तलब किया था। जिस पर उन्होंने हलफनामा दायर कर माफी मांगी। न्यायालय ने उनकी माफी को स्वीकार कर लिया है व इस मामले में अब उन्हें राहत देते हुए आगे कार्यवाही न किए जाने की बात कही है। न्यायमूर्ति डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति रजनीश कुमार की खंडपीठ के समक्ष गुरूवार को बलरामपुर अस्पताल के डायरेक्टर की ओर से हलफनामा दाखिल कर माफी मांगी गई। डायरेक्टर ने अपने हलफनामे में कहा कि उनका कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने का कोई इरादा नहीं था। उल्लेखनीय है कि 6 अप्रैल को एक पीड़िता के आयु निर्धारण के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन करने का आदेश न्यायालय ने डायरेक्टर/सीनियर सुपरिंटेंडेंट बलरामपुर अस्पताल को दिया था। इस सम्बंध में राजकीय नारी सुरक्षा गृह की सुपरिंटेंडेंट की ओर से भी उन्हें पत्र लिखा गया था। लेकिन उक्त पत्र का लिखित जवाब देते हुए डायरेक्टर ने कहा कि शसनादेशों के तहत मेडिकल बोर्ड मुख्य चिकित्सा अधिकारी के ही आदेश पर गठित हो सकता है। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की कि शासनादेश कोर्ट के आदेश से बड़ा नहीं हो सकता। शासनादेश सरकार के कामकाज को सुगम बनाने के लिए होता है और यह किसी प्रकार का विधायन नहीं होता। लिहाजा बलरामपुर अस्तपाल के अधिकारी न्यायालय का आदेश मानने के लिए बाध्य थे। कोर्ट ने उनके इस रवैये पर उनका स्पष्टीकरण भी तलब किया था। जिसके अनुपालन में गुरूवार को डायरेक्टर ने बिना शर्त माफी मांगी। वहीं पीड़िता शासकीय अधिवक्ता विमल श्रीवास्तव ने न्यायालय को बताया कि पीड़िता के उम्र निर्धारण के लिए अब मेडिकल बोर्ड का गठन कर लिया गया है और अगली सुनवाई पर बोर्ड की रिपोर्ट पेश कर दी जाएगी। जिस पर न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तिथि 24 मई लगा दी।

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