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सरकारी अस्पतालों में अब से निमोनिया का टीकाकरण होगा फ्री

-स्वास्थ्य एवं परिवार कलयाण मंत्रालय की ओर से पीसीवी वैक्सीन पर आयोजित हुई कार्यशालालखनऊ। निज संवाददाता।2011 के आंकड़ों के अनुसार हर बीस सेकेंड में एक बच्चे की मौत निमोनिया के कारण होती है जिनमें बीस प्रतिशत केस भारत के हैं। नवजात शिशुओं से लेकर पांच साल तक के बच्चों की मौत का मुख्य कारण निमोनिया है। सरकार द्वारा यूपी के छह जिलों में पिछले साल मुफ्त टीकाकरण की सुविधा को सरकारी अस्पतालों में शुरू कर दिया गया है। अब इसके विस्तार के लिए दूसरे चरण को 19 मई से लखनऊ, बाराबंकी, हरदोई, फैजाबाद, गोंडा और बस्ती में शुरू कर दिया जाएगा। जिससे सभी सरकारी महिला अस्पतालों,बीएमसी,सीएचसी,पीएचसी और गांवों में नवजात शिशुओं का टीकाकरण मुफ्त में हो सकेगा। यह बातें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की महानिदेशक डॉ नीना गुप्ता ने होटल गोल्डन टयूलिप में आयोजित कार्यशाला में कही। मौका था स्वास्थ्य एवं परिवार कलयाण मंत्रालय की ओर से न्यूमोकोकल कॉन्ज्यूगेट वैक्सीन (पीसीवी) के विस्तार में मीडिया कार्यशाला का। उन्होंने बताया कि नवजात शिशुओं से लेकर पांच साल की उम्र के बच्चों को अलग-अलग तीन आयु वर्गों में तीन डोज लगवाने का खर्चा प्राइवेट अस्पतालों में 1,500 से 3,000 तक आता है। अस्पतालों का यह कत्तवर्य है कि वह एएनएम, आशा बहुओं के माध्यम से महिलाओं को जागरूक करें। कार्यशाला में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) के ओएसडी रूटिन इम्यूनाइजेशन के ऑफिसर डॉ आशुतोष अग्रवाल, नेशनल हेल्थ मिशन के जीएमआरआई डॉ विकास सिघंल, यूनीसेफ के हेल्थ ऑफिसर डॉ प्रफुल्ल भाराद्वाज, एसईपीआईओ डॉ एपी चतुर्वेदी और यूनीसेफ की गीताली त्रिवेदी मौजूद रही।- न्यूमोकोकल बैक्टीरिया बच्चों के लिए है खतरनाकशरीर में न्यूमोकोकल बैक्टीरिया होने से निमोनिया, ब्लड संक्रमण, साइनोसाइटिस, टिशू इंफेक्शन और दिमागी बुखार होता है जो बच्चों के लिए खतरनाक होता है। इस बैक्टीरिया के एक बार होने से यह शरीर में लंबे समय तक रहता है साथ ही यह दूसरे लोगों में तेजी से फैलता है। जिन बच्चों को पैदा होने के बाद मां का दूध नहीं मिलता और कुपोषित बच्चों को निमोनिया होने का खतरा सर्वाधिक बना रहता है। पीसीवी टीकाकरण द्वारा न्यूमोकोकल बैक्टीरिया से सुरक्षा मिलती है।-24 प्रतिशत बच्चों के अभिभावक भय के कारण नहीं लगवाते टीकापिछले साल यूपी के फेज़ वन के अर्न्तगत आने वाले छह जिलों में 5,59,410 बच्चों को मुफ्त में पीसीवी टीकाकरण किया गया। डब्ल्यूएचओ के ओएसडी रूटिन इम्यूनाइजेशन के ऑफिसर डॉ आशुतोष अग्रवाल ने बताया कि लगभग 56 लाख बच्चों को सलाना टीकाकरण कराने का टारगेट है। लेकिन केवल 74 प्रतिशत बच्चों को टीकाकरण ही किया जा पाता है। क्योंकि दो प्रतिशत ऐसे बच्चे है जिनको कोई टीका नहीं लगता है वहीं 24 प्रतिशत बच्चें ऐसे हैं जिनके अभिभावक डर के कारण टीकाकरण नहीं करवाते हैं। ऐसे में देश में बच्चों की सुरक्षा के लिए टीकाकराण के प्रति लोगों को जागरूक करना आवश्यक है ।-गंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चों को भी लग सकता है टीका डॉ विकास सिघंल ने बताया कि एचआईवी, एड्स और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को भी पीसीवी का टीका लगवा सकते हैं। नवजात शिशु से पांच साल तक के बच्चों को डेढ़ महीनें, साढ़े तीन महीनें और दूसरा बूस्टर टीका नौं महीनें पर लगवाने से बच्चों को निमोनिया नहीं हो पाएगा।

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