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निगमों की हालत पर पसीज नहीं रहा शासन

निगम महासंघ ने अपर मुख्यसचिव से की मुलाकात

कई बार वार्ताओं के बाद भी समस्याओं का हल नहीं

उत्तर प्रदेश राज्य निगम कर्मचारी महासंघ की मांगों पर शासन की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा है। निगमों की हालत प्रदेश में सबसे अधिक खराब होती जा रही है।

इसको लेकर महासंघ के प्रतिनिध और रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री गिरीश मिश्र ने बुधवार को सार्वजनिक उद्यम विभाग के अपर मुख्य सचिव से मुलाकात की। उनको प्रदेश में स्थापित निगमों के कार्मिकों की लम्बित समस्याओं पर चर्चा की। परिवहन निगम के कार्मिकों को सातवें वेतनमान और मंहगाई भत्ते की पत्रावली को जल्द निस्तारित करने का अनुरोध किया। निगम महासंघ के अध्यक्ष मनोज कुमार मिश्र ने बताया कि सातवें वेतन का लाभ दिये जाने के लिये सार्वजनिक उद्यम विभाग से 03 जनवरी 2017 को शासनादेश जारी कर दिया था। परिवहन निगम के कार्मिकों को सातवें वेतनमान और महंगाई भत्ते का लाभ दिये जाने के लिये सितम्बर 2017 में ही प्रस्ताव निदेशक मण्डल से पारित कराकर शासन को भेजा था। रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद की ओर से दी गयी आन्दोलन की नोटिस पर 19 फरवरी को प्रमुख सचिव परिवहन के स्तर पर हुई सहमति के बाद पत्रावली सार्वजनिक उद्यम विभाग भेजी गयी थी। इसके शीघ्र निस्तारण के लिये बुधवार को निगम महासंघ के अध्यक्ष मनोज मिश्रा और वरिष्ठ उपाध्यक्ष व रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री गरीश मिश्र ने अपर मुख्य सचिव सार्वजनिक उद्यम विभाग से मुलाकात की। प्रदेश के अन्य निगमों के कार्मिकों की लम्बित समस्याओं के बारे में एक बैठक आहुत कर उनपर निर्णय कराने का आश्वासन दिया गया।

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प्रदेश में निगमों में लागू वेतनमान

36 निगम स्थापित

मात्र 9 निगमों में सातवां वेतन

17 निगमों में छठा वेतन

02 निगमों में पांचवां वेतन

08 निगमों में चौथा वेतनमान

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2016 से नहीं मिला महंगाई भत्ता

कई निगमों में अभी तक जुलाई 2016 से महंगाई भत्ता भी नही मिला है और पांच निगमों के कर्मचारियों की अधिवर्षता आयु 58 वर्ष ही है।

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