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कृषि सुधार के लिए अच्छी सोच होनी चाहिए : पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत

लखनऊ (हिसं) । नाबार्ड कृषि भूमि का उद्धार करने की अहम भूमिका निभा रही है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि सिचाई योजना से विकास हुआ,लेकिन मौजूदा सरकार ने योजना का नाम बदल दिया। ऐसा करने से कृषि में सुधार सम्भव नही आया। कृषि के गिरते स्तर पर चिंतन करें, यहां कोई चमत्कार नही होने वाला। पहले कृषि क्षेत्र की पैदावार को बढ़ाये।देश की तरक्की के लिए कृषि सुधारो के लिए अच्छी सोच की जरूरत होनी चाहिए।ये बांते उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आल इंडिया नाबार्ड एम्प्लाइज एसोसिएशन की तरफ से ' वर्तमान कृषि संकट और नाबार्ड की भूमिका' विषयक संगोष्ठी में उद्धघाटन समारोह में कही। संस्था के अध्यक्ष जोस टी अब्राहम ने उन्हें स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया। कानपुर रोड , एलडीए कालोनी सेक्टर ' एच 'स्थित नाबार्ड सभागार में दसवां दो दिवसीय संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री रावत ने कहा कि किसानों की तकलीफों के लिए बातचीत करनी होगी। बदलाव के लिए पहले सोच जरूरी है। झूठे वादों से ग्रामीण किसानों का कोई फायदा नही होने वाला। नाबार्ड कर्मियों को प्रोत्साहन करने की वकालत की। संस्था के महासचिव विजय भोसले ने बताया कि नाबार्ड में कर्मचारियों कमी के लि मृतक आश्रित,वेज रिवीजन, ग्रुप सी-डी की भर्ती की मांग भी उठायी।कार्यक्रम में डॉ. उत्सा पटनायक, डॉ. विजु कृष्णन, संयुक्त महासचिव विजय भोसले, राणा मित्रा ने अपने विचार रखे। गुरुवार को भारतीय बैंक कर्मचारी संघ के महासचिव प्रदीप विश्वास प्रतिभागियों को सम्बोधित करेंगे।

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