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लाल बिहारी ‘मृतक के मामले में सरकार को जवाब देने का आखिरी मौका

राजस्व रिकॉर्ड में 18 साल तक मृतक रहे लाल बिहारी ने मांगा है 25 करोड़ का मुआवजा विधि संवाददाता लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लाल बिहारी ‘मृतक के मामले में जवाब देने के लिए राज्य सरकार को अंतिम मौका दिया है। न्यायालय ने मामले की अग्रिम सुनवाई के लिए 19 मार्च की तिथि तय करते हुए, स्पष्ट किया है कि इसके बाद सरकार को और समय नहीं दिया जाएगा। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय लाम्बा और न्यायमूर्ति अनंत कुमार की खंडपीठ ने लाल बिहारी ‘मृतक की याचिका पर दिया। आजमगढ निवासी याची लाल बिहारी ‘मृतक ने याचिका में कहा है कि वर्ष 1976 में कुछ लोगों ने उसकी जमीन कब्जा करने के लिए सरकारी अधिकारियों से मिलकर उसे मृतक घोषित करवा दिया था। खुद को जिंदा साबित करने के लिए उसने लम्बी लड़ाई लड़ी। राजस्व रिकॉर्डों में वह पूरे 18 साल तक मृतक के तौर पर दर्ज था। आखिरकार 30 जून 1994 को प्रशासन ने उसे जीवित माना। याची ने उसके साथ हुए इस कृत्य के लिए 25 करोड़ मुआवजा दिलाने की मांग न्यायालय से की है। याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय इसे अजीब और विचित्र मामला करार दिया था व मुआवजे की मांग पर जवाब देने के निर्देश सरकार को दिए थे। इस पर अपर महाधिवक्ता रमेश कुमार सिंह राज्य सरकार की ओर से पेश हुए व जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए और समय देने की मांग की। इस पर न्यायालय ने सरकार को आखिरी मौका देते हुए, मामले की अग्रिम सुनवाई 19 मार्च तय कर दी।

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