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हाईकोर्ट ने एसएसपी से पूछा, क्यों न उनके खिलाफ की अवमानना की कार्यवाही की जाए

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एसएसपी लखनऊ को हलफनामा दाखिल कर बताने को कहा है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए। न्यायालय ने एसएसपी लखनऊ से यह भी पूछा है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद उनकी ओर से जवाब क्यों नहीं दाखिल किया गया।

यह आदेश न्यायमूर्ति संजय हरकौली की एकल सदयीय पीठ ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। उक्त याचिका भुनेश वर्मा की ओर से उसकी मां संतोषी वर्मा द्वारा दाखिल की गई है। याचिका में संतोषी वर्मा ने अपने मां-पिता पर उनके बेटे को जबरन बंदी बनाकर रखने का आरोप लगाया है। न्यायालय ने मामले की पिछली सुनवाई के दौरान ही कहा था कि याचिका पिछले वर्ष 31 मई से विचाराधीन है लेकिन न्यायालय के बार-बार आदेश देने के बावजूद सरकारी वकील को एसएसपी लखनऊ द्वारा मामले के सम्बंध में निर्देश नहीं दिए जा रहे हैं। गुरूवार को मामले की सुनवाई के दौरान एक हलफनामा दाखिल किया गया जिससे न्यायालय संतुष्ट नहीं हुई। न्यायालय ने कहा कि एसएसपी ने बजाय सरकारी वकील द्वारा कोर्ट को सूचना देने के, अपनी जिम्मेदारी एक कनिष्ठ अधिकारी पर डाल दी और उन्होंने अपने कनिष्ठ अधिकारी द्वारा ही यह भी नहीं बताया कि कोर्ट के पूर्व के आदेशों के अनुपालन के बावत क्या किया गया। न्यायालय ने पूछा कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही चलाई जाए। साथ ही यह भी बताने को कहा कि कोर्ट को पुलिस की दया पर क्यों छोड़ दिया गया। न्यायालय ने कहा कि इस तरह की कार्यप्रणाली बर्दाश्त करने के लायक नहीं है और इस पर दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

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