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गीता ज्ञान यज्ञ

गीता सुनने का अधिकार निर्मल मन वाला होता हैलखनऊ। निज संवाददातागीता सुनने का अधिकारी न तो लम्बी आयु वाला होता है और न ही धन, बल व दानी वाला होता है। गीता सुनने का अधिकार तो सिर्फ निर्मल मन वाला ही होता है जो भगवान की चरण शरण ग्रहण करता है। यह बात बीरबल साहनी मार्ग स्थित श्री खाटू श्याम मन्दिर में चल रहे गीता ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन गुरुवार को स्वामी अभयानन्द सरस्वती जी महाराज ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि गीता सुनने का अधिकारी यदि लम्बी आयु वाला होता तो भगवान श्रीकृष्ण सबसे पहले कृपाचार्य अशवथामा चिरंजीवी है उनको सुनाते और यदि निकटता की बात है तो स्वयं भगवान भीष्म पितामह के चरणों के निकट खड़े है उनको भी गीता का ज्ञान नही देते है। उन्होंने कहा कि यदि बलशाली को गीता का ज्ञान देना होता तो भीम से बलशाली कौन, यदि दानी को देना होता तो कर्ण से बड़ा दानी कौन। स्वामी अभयानन्द ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने ज्ञान केवल अर्जुन को इस लिए देते है कि अर्जुन केवल भगवान का वरण करना चाहता है न कि उनकी अक्षुणी सेना का। उन्होंने कहा कि पात्रता उसी को होता है जो केवल प्रभु की शरण को प्राप्त करता है। स्वामी अभयानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि गीता ज्ञान का अधिकारी होने का पात्र हर वह है जो निर्मल मन से भगवान की चरण शरण ग्रहण करता है।कथा से पूर्व स्वामी ओंकारानन्द सरस्वती, महाराजा अग्रसेन धर्म जागरण समिति के अध्यक्ष शिव कुमार अग्रवाल और श्री श्याम परिवार के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने आचार्य श्री का स्वागत किया।

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