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केजीएमयू के ऑर्गन ट्रांसप्लांट डिपार्टमेंट के निष्क्रिय होने का आरोप

लखनऊ। विधि संवाददाता

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के समक्ष एक जनहित याचिका दाखिल करते हुए, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के ऑर्गन ट्रांसप्लांट विभाग के निष्क्रिय हो जाने का आरोप लगाया गया है। जिस पर न्यायालय ने केजीएमयू को दो सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन की खंडपीठ ने हरिशंकर पांडेय की याचिका पर दिया। याची के मुताबिक याचिका में ऑर्ग़न ट्रांसप्लांट विभाग के पूरी तरह निष्क्रिय हो जाने का मुद्दा उठाया गया है। याचिका में कहा गया है कि इस विभाग की स्थापना वर्ष 2013 में की गई। कुलपति ने विभाग के खुलने के बाद कई सहायक प्रोफेसरों, पैरा मेडिकल स्टाफ आदि की कई नियुक्तियां भी कीं। इसके अलावा ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी करोड़ों के इक्यूपमेंट भी खरीद डाले। याची के मुताबिक इन सबके बावजूद वर्ष 2015 में एक किडनी ट्रांसप्लांट के सिवा आज तक इस विभाग ने ऑर्गन ट्रांसप्लांट का एक भी ऑपरेशन नहीं किया है। याची के अनुसार इस विभाग के लिए नियुक्त हुए लोगों को भी दूसरे विभागों में स्थानांतरित कर दिया गया। याची ने यह भी आरोप लगाया है कि अंगों के लिए जरूरतमंद लोगों को किस प्रकार चुनाव किया जाएगा, इसकी कोई गाइडलाइन नहीं है। न्यायालय ने याचिका पर जवाब देने के लिए केजीएमयू को दो सप्ताह का समय दिया है जिसके एक सप्ताह बाद याची को प्रत्युत्तर देना होगा। न्यायालय ने मामले की अग्रिम सुनवाई 8 जनवरी को शुरूआत के पांच केसों में ही करने का भी निर्देश दिया है।

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