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जहां सुमति तहां सम्पति नाना,जहां कुमति तहां विपति विदाना-अवधेन्द्र प्रपन्नाचार्य

- फूलचन्द्रखेडा गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवद कथा का समापनमलिहाबाद। हिन्दुस्तान संवादकलयुग केवल नाम अधारा सुमिरि सुमिरि नर उतरहि पारा। फूलचन्द्रखेडा गांव में 1 दिसम्बर से चल रही श्रीमद्भागवद कथा का गुरूवार को सातवें दिन समापन किया गया। समापन के मौके पर अयोध्या धाम के कथावाचक अवधेन्द्र प्रपन्नाचार्य ने कलियुग की महिमा बताते हुये कहा कि अन्य युगों की अपेक्षा कलियुग मोक्ष प्राप्ति का सुगम मार्ग प्रदान करता है।उन्होनें मानव संस्क्रति के पतन पर चिन्ता व्यक्त करते हुये कहा कि आज मनुष्य अपनें कर्तव्यों को भूलता जा रहा है। वह त्वरित लाभ की कामना से कर्म तो करता है किन्तु उसका आदि अन्त नही परखता। जिसके चलते वह दुखों की ओर अग्रसारित हो रहा है। उन्होनें बढ रहे अनाचार पर कटाक्ष करते हुये कहा कि यदि समय रहते मानव अपनें कर्म और विचारों से मलिनता दूर नही करता तो निश्चित रूप से वह पापोन्मुखी हो जायेगा।

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