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आईटीआई: शिशिक्षु प्रशिक्षण में बिचौलियों का खेल खत्म

- अप्रेंटिस के लिए ऑनलाइन होगा बच्चों का डाटा

- इंडस्ट्री ऑनलाइन ही करेंगी बच्चों को आमंत्रित

प्रधानमंत्री के स्किल्ड इंडिया प्रोग्राम के तहत आईटीआई करने के बाद शिशिक्षु(अप्रेंटिस) प्रशिक्षण को अब ऑनलाइन कर दिया गया है। शिशिक्षु प्रशिक्षण ऑनलाइन होने से प्रधानाचार्यों की मनमानी पर अंकुश लगेगा। वहीं, अप्रेंटिस में बिचौलियों का खेल भी पूरी तरह खत्म हो जाएगा। अप्रेंटिस कराने के लिए कंपनियों को अब अपना पूरा ब्यौरा ऑनलाइन दिखाना होगा, जबकि आईटीआई करने के बाद अप्रेंटिस करने वाले बच्चों को अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। अप्रेंटिस का प्रोग्राम ऑनलाइन होने से प्रदेश भर के लगभग 1.25 लाख बच्चों को लाभ मिलेगा।

दरअसल, कई बार ऐसी शिकायतें मिली थी कि अप्रेंटिस करने वाले छात्रों को स्टाइपेंड मिलता है। एक साल की अप्रेंटिस में प्रतिमाह मिलने वाले इस स्टाइपेंड का कुछ हिस्सा अथवा दो माह का स्टाइपेंड बिचौलिये पहले ही खा जाते थे, जिसके बाद ही बच्चों को अप्रेंटिस के लिए भेजा जाता था, लेकिन अब कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा इस प्रोग्राम को भी ऑनलाइन कर अप्रेंटिस को आसान बना दिया गया है।

ऑनलाइन मिलेगा अप्रेंटिस के लिए आमंत्रण

इंडस्ट्री और छात्र दोनों को ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। कंपनी को अपनी संपूर्ण जानकारी के साथ अप्रेंटिस कराने वाली ट्रेड की जानकारी देनी होगी। छात्रों भी अपना डाटा ऑनलाइन apprenticeship.gov.in पर देंगे। छात्रों को रजिस्ट्रेशन नंबर भी मिलेगा, जिससे लॉगइन करना होगा। जिन कंपनियों को डाटा ऑनलाइन वेबसाइट पर नहीं मिलेगा, वे कंपनियां अब अप्रेंटिस नहीं करा सकेंगी। कंपनियां ऑनलाइन ही बच्चों को अपने यहां अप्रेंटिस कराने वाली ट्रेड के लिए आमंत्रित करेंगी।

अप्रेंटिस कराना अब हुआ अनिवार्य

अभी तक रजिस्टर्ड कंपनियों में अप्रेंटिस के लिए टॉप टू बाटम 10 कर्मचारियों पर एक को अप्रेंटिस कराना अनिवार्य होता था, लेकिन बदले हुए नियमानुसार अब 100 कर्मचारियों पर कम से कम 3 और अधिकतम 11 लोगों को अप्रेंटिसशिप कराना अनिवार्य कर दिया गया है। 39 से कम कर्मचारी वाली कंपनी अपनी इच्छानुसार अप्रेंटिस करा सकती हैं।

बच्चों का स्टाइपेंड बढ़ा

इंडस्ट्री में ट्रेनिंग करने वाले प्रत्येक छात्र को कंपनी स्टाइपेंड देती है। इन अर्धकुशल वर्करों को उत्तर प्रदेश द्वारा 2016-17 के न्यूनतम वेतन के हिसाब से दो वर्ष के अप्रेंटिस के दौरान 7818 रुपये मिलने होते हैं, लेकिन इसका 70 फीसदी हिस्सा बच्चे को प्रथम वर्ष में एवं दूसरे वर्ष में 80 फीसदी रुपये मिलेंगे। स्टाइपेंड देने वाली कंपनियों को भारत सरकार द्वारा प्रति शिशिक्षु 1500 तक देय होगा।

वर्जन

कंपनियां धीरे धीरे अपना डाटा अपलोड कर रही हैं। यकीनन, ऑनलाइन अप्रेंटिस होने से बिचौलियों का खेल समाप्त होगा और राहत मिलेगी। कंपनियां अब रजिस्टर्ड बच्चों को अप्रेंटिस करा सकेंगी।

नीरज कुमार, अपर निदेशक शिशिक्षु/प्रशिक्षण,

प्रशिक्षण एवं सेवायोजन कार्यालय।

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