लखनऊ अग्निकांड: मुख्य आरोपी का भाई सुरेंद्र फरार, दिल्ली और प्रयागराज समेत कई ठिकानों पर पुलिस की दबिश
लखनऊ अग्निकांड के मुख्य आरोपी एवं भवन स्वामी का भाई सुरेंद्र शुक्ला की तलाश में पुलिस है। मोबाइल बंद होने से उसकी लोकेशन नहीं मिल पा रही है, जबकि प्रयागराज, सीतापुर और दिल्ली समेत चार जिलों की पुलिस विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। संपत्तियों की भी जांच शुरू कर दी गई है।

लखनऊ अग्निकांड का मुख्य आरोपी एवं भवन स्वामी वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला का भाई सुरेंद्र शुक्ला की तलाश में पुलिस जुटी हुई है। मोबाइल बंद होने से उसकी लोकेशन नहीं मिल पा रही है, जबकि पुलिस की चार टीमें प्रयागराज, सीतापुर और दिल्ली समेत विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। साथ ही उसकी संपत्तियों की भी जांच शुरू कर दी गई है।
सुरेंद्र पीएमटी पेपर लीक कांड का भी आरोपी है। हुसैनगंज थाने में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज है। सुरेंद्र इस मामले में जेल भी गया था। इंस्पेक्टर अलीगंज ध्रुव कुमार के मुताबिक आरोपी सुरेंद्र घटना के बाद से फरार है। चार टीमें तलाश में लगाई गई हैं। सर्विलांस टीम लोकेशन का पता लगा रही है। काल डेटल्स के आधार पर उसके परिचितों के संपर्क में है। वहीं, अन्य टीमें दिल्ली, प्रयागराज और सीतापुर में उसके संभावित स्थानों पर दबिश दे रही हैं।
तफ्तीश के दौरान आरोपी की मड़ियांव और बीकेटी इलाके में संपत्तियों का ब्योरा पता चला है। उन संपत्तियों के बारे में भी जानकारी कर ली गई है। दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। अवैध मिलने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। आशंका है कि यह जमीने फर्जीवाड़ा कर खरीदी गई हैं।
सड़ांध से परेशान मोहल्ले वाले, पुलिस ने कराई सफाई
इंस्पेक्टर अलीगंज के मुताबिक इमारत में रखे पेट्स फूड्स पर फायर फाइटिंग के दौरान पानी डाला गया। पानी पड़ने के बाद उसमें सड़ांध हो गई है। भीषण दुर्गंध से लोग परेशान थे। उन्होंने बताया था। इसके बाद नगर निगम और जलकल विभाग की टीम बुलाकर शुक्रवार को उसकी सफाई शुरू कराई गई। दिन भर सफाई होती रही। दुर्गंध न आए इस लिए केमिकल का छिड़काव भी कराया गया।
उधर, अग्निकांड के बाद सभी कोचिंग सेंटर्स, लाइब्रेरी संचालन के नियम, एनओसी लेने के नियम भी कड़ें कर दिए गए हैं। प्रशासन द्वारा लगातार कोचिंग सेंटर को सील करने की कार्यवाही की जा रही है और सभी को निर्देशित किया है कि जबतक सभी तरह की एनओसी हासिल न कर लें, सील नहीं खुलेगी।
दरअसल, बागपत जिले में 99 फीसदी कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी संचालन करने वालों के पास किसी तरह की विभागीय एनओसी ही नहीं है। यह पोल अब इनपर सीलिंग कार्यवाही के दौरान सामने आ रही हैं। आवासीय घरों, दुकानों, बेसमेंट, संकरे रास्तों में ये कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी संचालित हो रही थी। प्रशासन ने अब इन को सील करते हुए विभिन्न विभागों से एनओसी लेने के निर्देश दिए हैं।
ये हैं कुछ नियम शर्तें
यदि संस्थान में 50 से अधिक छात्र नामांकित हैं, तो कोचिंग शुरू करने के 3 महीने के भीतर पंजीकरण कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
पंजीकरण के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक या उच्च शिक्षा विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय में आवेदन करना होता है। नियमों के अनुसार पंजीकरण शुल्क ट्रेजरी चालान के माध्यम से सरकारी खाते में जमा होगा।


