दिव्या की हत्या के बाद मानस और उसकी बहन को किसी और ने मारा? प्रज्ञा मिश्रा को क्यों शक

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लखनऊ में आईसीआईसीआई बैंक की महिला अधिकारी दिव्या की हत्या में उनकी बहन और यूट्यूबर प्रज्ञा मिश्रा ने कई सवाल उठाए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठाया है कि क्या दिव्या की हत्या करने वाले मानस और उसकी बहन शिबा को किसी तीसरे ने मारा है?

Lucknow Divya murder
लखऊ में मारी गई दिव्या मिश्रा (बीच में) और मानस (दाएं) और प्रज्ञा मिश्रा (फाइल फोटो)

लखनऊ में आईसीआईसीआई बैंक की महिला अधिकारी और यूट्यूबर प्रज्ञा मिश्रा की बहन दिव्या मिश्रा की उनके ही पति मानस ने गुरुवार को गोली मारकर हत्या कर दी थी। हत्या के बाद मानस की गिरफ्तारी के लिए उसके घर पहुंची पुलिस को दो और लाशें मिलीं। एक मानस की और दूसरी उसकी बहन शीबा की थी। पुलिस ने दावा किया कि दिव्या की हत्या करने के बाद मानस ने घर पर बहन की हत्या की और फिर सुसाइड कर लिया। अब प्रज्ञा मिश्रा ने आशंका जताई है कि मानस और उसकी बहन की हत्या किसी तीसरे व्यक्ति ने की है। प्रज्ञा ने पूरी वारदात पर कई सवाल उठाते हुए पुलिस से जांच कर इनके जवाब खोजने की अपील की है।

प्रज्ञा ने हत्या के अगले ही दिन आशंका जताई थी कि मानस की कोई मदद कर रहा था। हत्या के बाद आटो से घर भागना और उसके पास से बरामद तीन असलहे कई सवाल ख़ड़े कर रहे हैं। पुलिस को भी अब मानस के काल डिटेल से किसी तीसरे के इसमें शामिल होने के साक्ष्य मिले हैं। सोमवार को पुलिस की टीम इस बारे में जांच पड़ताल करने आईसीआईसीआई बैंक भी जाने वाली है।

प्रज्ञा ने वारदात को लेकर कई सवाल खड़े करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पुलिस से गहराई से जांच की अपील की है। प्रज्ञा ने कहा कि मानस ने तीन में से किसी को दूर से शूट नहीं किया। सबको सटाकर सिर में गोली मारी। क्या ये प्लान था या फिर दिव्या को मानस ने मारा, मानस और शीबा को किसी और ने मार दिया? प्रज्ञा ने कहा कि ये ओपन शट केस नहीं है। बहुत ज्यादा मिस्टीरियस केस है?

बैंक से घर जाने के बीच कहां रहा मानस

प्रज्ञा ने कहा कि बैंक और घर की दूरी 10-15 मिनट की थी। दिव्या की हत्या के बाद 35-45 मिनट मानस कहां था? क्या हत्याकांड और घर के रास्ते के बीच हत्यारा मानस कहीं और भी रुका था? अगर रुका था तो किसके पास? क्या मानस के घर के भीतर कोई तीसरा भी मौजूद था, जिसने मानस और उसकी बहन को मारा? क्या मानस के घर के भीतर घुसने और निकलने का कोई और रास्ता भी था?

मानस हिंग्लिश में लिखता था, स्टेटस अपडेट इंग्लिश में

आईसीआईसीआई बैंक के बाहर दिव्या की हत्या के बाद मानस ने अपने व्हाट्सएप का स्टेटस अपडेट किया था। उसने इंग्लिस में लिखा था कि दिव्या चीट कर रही थी। यह भी लिखा था कि हत्या का कारण प्रज्ञा और उसके पति गगन को पता है। प्रज्ञा ने सवाल उठाया कि क्या मानस के फोन में स्टेटस किसी और ने अपडेट किया, क्योंकि मानस हिंग्लिश में लिखता था। स्टेटस अपडेट इंग्लिश में था?

प्रज्ञा ने कहा कि डिवोस केस तो लंबे समय से चल रहा था। अंतिम स्टेटस में हत्यारे ने चीट शब्द लिखा। अगर मानस को मालूम था कि दिव्या उसे चीट कर रही है तो तलाक के केस में उसे अपनी पत्नी को चरित्रहीन साबित करके अपरहैंड मिल जाता। क्या ‘चीट’ शब्द पुलिस को भटकाने के लिए लिखा गया?

घर पर लाठी तक नहीं, तीन असलहे कहां से आए?

प्रज्ञा ने कहा कि असली बात ये नहीं है कि हत्यारा मानस सनकी, साइको, डुअल पर्सनालिटी, घरेलू हिंसा प्रेमी था। असली बात ये है कि जिस व्यक्ति के घर पर एक बांस की मजबूत लाठी भी नहीं थी, उसके घर पर दो पिस्टल और एक देसी तमंचा कहां से आया? कौन उसे इस हत्याकांड के लिए मोटीवेट कर रहा था? कहा कि वो बाजार से पकाने के लिए एक बार में सारी जरूरी सब्जियां नहीं ला सकता था। उसे रेयर पिस्टल कैसे मिले? कौन से हथियार किसकी हत्या में इस्तेमाल हुए?

जघन्य अपराध के लिए ट्रिगर कौन कर रहा था

प्रज्ञा ने कहा कि कोई व्यक्ति इतना ट्रिगर तभी होता है जब उसे कोई रोज भड़काए। किसने उसे इस जघन्य अपराध के लिए तैयार किया? क्या हत्यारे मानस की मानसिक स्थिति का किसी ने इस्तेमाल किया है? क्या किसी की नजर मानस के घर में मौजूद कथित ‘डेढ़ करोड़’ के स्त्रीधन पर थी? मानस साइको था। घरेलू हिंसा का आदी था, लेकिन समाज में सभ्यता दर्शाता था। वो चींटी नहीं मार सकता था।

पिस्टल कहां से आई, यह भी पता चलना चाहिए

हत्यारा घर में पिस्टल और तमंचे नहीं उगाया होगा कहीं से तो लाया होगा? अगर बैंक के सामान्य बाबू की पहुंच पिस्टल गिरोह तक है तो फिर लखनऊ को सतर्क रहने की जरूरत है। पुलिस को इन पहलुओं पर जांच करनी चाहिए। अगर इन सब सवालों के जवाब नहीं मिलते हैं, पिस्टल कहां से आईं नहीं मालूम चलता है तो केस किसी और एजेंसी को दिया जाना चाहिए। सच्चाई का बाहर आना बहुत जरूरी है। मेरी बहन और मानस की मानसिक बीमार बहन शीबा को न्याय मिलना चाहिए।

Yogesh Yadav

लेखक के बारे में

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योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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