फार्मर रजिस्ट्री को लेकर सीएम योगी ने दी बड़ी राहत, गेहूं खरीद में आ रही परेशानी दूर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गेहूं खरीद में किसानों को आ रही तकनीकी दिक्कतों को दूर करते हुए 'फार्मर रजिस्ट्री' की अनिवार्यता खत्म कर दी है। अब किसान पुरानी व्यवस्था के अनुसार ही सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेच सकेंगे।

उत्तर प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि अब किसान 'फार्मर रजिस्ट्री' की अनिवार्यता के बिना भी सरकारी क्रय केंद्रों पर अपना गेहूं बेच सकेंगे। इस फैसले से उन लाखों किसानों को फायदा होगा जो तकनीकी प्रक्रियाओं या रजिस्ट्री न होने के कारण अपनी उपज बेचने में दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।
पुरानी व्यवस्था के तहत होगी खरीद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जानकारी मिली थी कि 'फार्मर रजिस्ट्री' की नई प्रक्रिया के कारण कई केंद्रों पर खरीद की गति धीमी है और किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए मुख्यमंत्री ने आदेश दिया है कि किसान पूर्व के वर्षों की तरह ही आसान प्रक्रिया से अपना गेहूं बेच सकेंगे। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी किसान को अपनी उपज बेचने के लिए भटकना न पड़े और उन्हें समय पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ मिल सके।
सभी जिलाधिकारियों को तत्काल आदेश लागू करने के निर्देश
मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी निर्देशों के बाद सभी जिलाधिकारियों (DMs) को इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करने के आदेश दिए गए हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि क्रय केंद्रों पर किसानों को हर संभव सुविधा मिलनी चाहिए। यदि किसी केंद्र पर किसान को बेवजह परेशान किया गया या फार्मर रजिस्ट्री के नाम पर खरीद रोकी गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
किसानों में खुशी की लहर
गेहूं कटाई और खरीद के पीक सीजन में लिए गए इस निर्णय का किसान संगठनों ने स्वागत किया है। किसानों का कहना है कि फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया जटिल होने के कारण उन्हें केंद्रों पर इंतजार करना पड़ रहा था, लेकिन अब पुरानी व्यवस्था बहाल होने से वे आसानी से अपनी फसल बेच सकेंगे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि क्रय केंद्रों पर पेयजल, छांव और बैठने की समुचित व्यवस्था हो और किसानों के भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी न की जाए।
क्या है फार्मर रजिस्ट्री और क्यों आ रही थी दिक्कत?
दरअसल, केंद्र और राज्य सरकार के डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत 'फार्मर रजिस्ट्री' की शुरुआत की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों का एक व्यापक डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है। इसमें उनकी जमीन के विवरण से लेकर बोई गई फसल तक की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो। माना जा रहा था कि इससे बिचौलियों पर लगाम लगेगी और वास्तविक किसानों तक सीधा लाभ पहुंचेगा। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की धीमी गति, पोर्टल पर तकनीकी लोड और कई किसानों के पास अपडेटेड खतौनी या डिजिटल जानकारी न होने के कारण यह व्यवस्था गेहूं खरीद के वर्तमान सीजन में गले की फांस बन गई थी। कई क्रय केंद्रों पर रजिस्ट्रेशन के अभाव में गेहूं खरीद नहीं हो पा रही थी, जिसे देखते हुए सीएम योगी ने इस जटिल प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया है।
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Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।
पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।


