डार्लिंग पेपर आउट कर लिया कहने वाला प्रोफेसर बुरी तरह फंसा, वायरल ऑडियो पर दी सफाई
डार्लिंग पेपर आउट कर लिया कहने वाला प्रोफेसर बुरी तरह फंस गया है। प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह ने वायरल ऑडियो पर सफाई दी है कि बोला-जुबान फिसल गई है।

डार्लिंग पेपर आउट कर लिया कहने वाला प्रोफेसर बुरी तरह फंस गया है। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह ने वायरल ऑडियो पर सफाई दी है कि बोला-जुबान फिसल गई है। बताया गया कि आरोपी शिक्षक ने समिति के सामने वायरल ऑडियो में अपनी आवाज होने की बात स्वीकार की, हालांकि उन्होंने इसे ‘जुबान फिसलना’ बताया।
लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रा उत्पीड़न मामले ने सोमवार को बड़ा मोड़ ले लिया। प्राणीशास्त्र विभाग के शिक्षक डॉ. परमजीत सिंह से जुड़े कथित आपत्तिजनक ऑडियो वायरल होने और छात्रा को प्रताड़ित करने के आरोपों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आपातकालीन कार्यपरिषद की बैठक बुलाकर सख्त रुख अपनाया। बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने की। बैठक में आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की जांच रिपोर्ट पेश की गई।
रिपोर्ट में उपलब्ध साक्ष्यों, छात्रा के बयान और वायरल ऑडियो के आधार पर शिक्षक का आचरण गंभीर, अनैतिक और अनुचित माना गया। कार्यपरिषद ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलपति की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय अनुशासन समिति गठित कर दी है। इसमें एपी सेन गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव और विवि के विधिक सलाहकार प्रो. आनंद विश्वकर्मा को सदस्य बनाया गया है।
समिति 24 घंटे में अंतरिम रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर मंगलवार को होने वाली अगली बैठक में आरोपी शिक्षक के खिलाफ अंतिम कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि विश्वविद्यालय छात्राओं की सुरक्षा और सम्मान से कोई समझौता नहीं करेगा तथा दोषियों के खिलाफ उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सभी कॉलेजों में पीठासीन अधिकारी होंगे नियुक्त
विश्वविद्यालय प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सभी संबद्ध कॉलेजों में पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति, शिकायत तंत्र को सक्रिय करने और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर जागरूकता कार्यक्रम चलाने का भी फैसला लिया है।
लैपटाप और अन्य डेटा खंगाल रही साइबर क्राइम सेल
पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद प्रोफेसर परमजीत सिंह का लैपटाप और मोबाइल कब्जे में ले लिया था। साइबर क्राइम सेल अब उसके सोशल मीडिया अकाउंट के अलावा अन्य चैट हिस्ट्री का डेटा खंगाल रही है। कई चैट हिस्ट्री जो प्रोफेसर ने डिलीट की थी उन्हें भी रिकवर करने का प्रयास साइबर सेल कर रही है। आशंका है कि डेटा में कई अहम जानकारियां पुलिस को मिलेंगी।
प्रोफेसर कई से था संपर्क में व्हाट्सएप ने खोले राज
गिरफ्तार लखनऊ विश्वविद्यालय का असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह ने कई छात्राओं के संपर्क में था। यह चौकाने वाले राज पुलिस की तफ्तीश में मोबाइल की काल डिटेल्स और व्हाट्सएप से खुले हैं। प्रोफेसर डॉ. परमजीत जन्तु विज्ञान व अन्य विषयों के पेपर लीक कराने, एक्ट्रा क्लास देने का झांसा देकर कई छात्राओं जाल में फंसा रखा था। वह उनसे फोन कर मिलने का दबाव बनाता था। हसनगंज पुलिस टीम अब डॉ. परमजीत सिंह के मोबाइल डेटा की मदद से छात्राओं से संपर्क करने का प्रयास कर रही है। अगर कोई छात्रा तहरीर देगी तो पुलिस विवेचना में उसके भी आरोपों को जोड़कर अपनी तफ्तीश आगे बढ़ाएगी। आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ पुलिस साक्ष्य संकलन कर रही है। हाईप्रोफाइल केस होने के कारण पुलिस फूंक-फूंककर कदम रख रही है। पुलिस ने प्रोफेसर और छात्रा के बीच बातचीत के वायरल आडियो को जांच के लिए उसका सैम्पल विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा है।
लेखक के बारे में
Deep Pandeyदीप नरायन पांडेय लाइव हिन्दुस्तान में पिछले आठ सालों से यूपी की खबरें करते हैं। डिजिटल, टीवी और प्रिंट जर्नलिज्म में 15 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दीप नरायन पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं। दीप अब डिजिटल मीडिया के जाने माने नाम बन गए हैं। दीप हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को बेहतर समझते हैं। यूपी की राजनीति के साथ क्राइम की खबरों पर अच्छी पकड़ है। सामाजिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और हेल्थ पर भी लिखते हैं। दीप पाठकों की पसंद को समझने और उसी तरह से न्पूज प्रस्तुत करने में माहिर हैं। दीप सरल भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाते हैं। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने-लिखने में भी रुचि रखते हैं। मास कम्युनिकेशन में बीए और एमए दीप नरायन पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा के रहने वाले हैं। दीप ने पत्रकारिता की शुरुवात लखनऊ से की। टीवी चैनल से करियर का आगाज करने वाले दीप इसके बाद प्रिंट अमर उजाला लखनऊ में भी रहे। हिन्दुस्तान प्रिंट में वाराणसी, गोरखपुर, फिर लखनऊ में कार्य के दौरान विभिन्न जिलों के डेस्क इंचार्ज रहे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव 2012, 2017, 2022, लोकसभा चुनाव, पंचायत चुनावों के दौरान बेहतर कवरेज कर चुके हैं।
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