सात साल में लवमैरिज का दि एंड, यातनाओं से दुखी होकर दामिनी ने बनाया था पति के मर्डर का प्लान
यूपी के मेरठ में 2019 में लव मैरिज करके महिला जिस युवक की पत्नी बनी थी। सात साल बाद उसी युवक के लिए महिला काल बन गई। शादी के कुछ दिनों बाद आई रिश्तों में खटास के बाद महिला ने पति की हत्या का प्लान बना लिया था।

Meerut Murder: यूपी के मेरठ में हुए हत्याकांड ने लोगों को झकझोर दिया। सात साल पहले दामिनी ने अतुल से लवमैरिज की थी, लेकिन शादी के कुछ दिन बाद ही दोनों का रिश्ता बिगड़ता चला गया। शादी के दो साल बाद दोनों के रिश्तों में जरूरत से ज्यादा खटास पैदा हो गई। दोनों के बीच मारपीट शुरू हो गई थी। तभी से दामिनी ने पति को रास्ते से हटाने की ठान ली थी। दामिनी के अनुसार पति की यातनाओं से दुखी होकर वह हर रोज पति की हत्या के लिए नए-नए तरीके खोजने लगी थी। पति को अपनी जिंदगी से दूर भेजने के लिए दामिनी रोज साजिश कर रही थी।
दामिनी ने इसके लिए दूसरे माध्यमों को भी तलाश रही थी। पिछले एक साल से देशभर में हुई पतियों की हत्या की घटनाओं पर भी दामिनी नजर रख रही थी। इसके अलावा दामिनी ने इंटरनेट पर परफेक्ट क्राइम को लेकर जानकारी कर रही थी। साथ ही ये भी देख रही थी पुराने केस में किन तरीकों से पुलिस ने आरोपियों पकड़ा था। ऐसे में मेरठ का सांप कांड दामिनी को दोबारा से अंजाम देना आसान लगा। हालांकि इस बार दामिनी और तुषार ने पुराने केस की गलती नहीं दोहराई।
2019 में दामिनी ने अतुल से की थी लवमैरिज
दामिनी ने अतुल से वर्ष 2019 में लव मैरिज की थी और दोनों कुछ समय तक खुशी से रहे। दामिनी ने खुलासा किया कि शादी के दो साल बाद अतुल मारपीट करने लगा और यातनाएं देने लगा। अतुल की इन हरकतों से परेशान हो गई थी। करीब एक साल पहले तुषार से प्यार हो गया। इसके बाद से अतुल को रास्ते से हटाने के लिए तरीके देखने लगे थे। दामिनी ने देशभर में पतियों की हत्या के चर्चित तमाम मामलों को गौर से इंटरनेट पर पढ़ना शुरू कर दिया। इस तरह की हर घटना पर नजर रखती थी और अखबार में भी पढ़ती थी। मेरठ के नीला ड्रम केस यानी सौरभ हत्याकांड में जिस तरह से साहिल और मुस्कान ने अंजाम दिया, उसे शुरू से लेकर आखिरी तक देखा था। वहीं बहसूमा के सांप कांड, इंदौर के राजा रघुवंशी को किस तरह से पत्नी सोनम राजवंशी ने मेघालय ले जाकर हत्या कराई, ये भी पूरा केस देखा। पुणे में जिस तरह से केतन की उसकी मंगेतर सिया गोयल ने अपने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर किले से नीचे धकेलकर हत्या करने की भी जानकारी थी।
पिछले केस की गलतियां नहीं दोहराई
सांप कांड में अमित को पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप ने गला दबाकर मार दिया था। इसके बाद सर्पदंश से मौत दिखाने को एक रेट स्नैक लाश पर छोड़ दिया था। हालांकि, जांच में पता चला कि इस सांप के काटने से मौत नहीं हो सकती, चूंकि यह जहरीला नहीं होता। दूसरी ओर, अमित की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने यानी गला दबाने से मौत का खुलासा हुआ। इसके बाद पुलिस ने पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को गिरफ्तार किया था। ऐसे में दामिनी ने इस एंगल पर खुद को बचाने की प्लानिंग की थी। अतुल को नींद की गोलियां दी और सबसे जहरीला सांप मंगवाया था। जब अतुल सोया था तो उसके कपड़ों में करैत सांप को छोड़ दिया। दामिनी और तुषार मान रहे थे कि ऐसा करके पकड़े नहीं जाएंगे।
ऐसे पकड़े गए दामिनी और तुषार
| सांप घर के अंदर कैसे घुसा और अंदर कमरे में अतुल के बेड तक कैसे पहुंचा, ये बात पुलिस को खटक रही थी। |
| पुलिस ने दामिनी के कॉल डिटेल की जांच की तो तुषार से लगातार बातचीत और मैसेज का खुलासा हुआ। |
| तुषार को हिरासत में लेकर मोबाइल जांच में उसके मोबाइल से इसी सांप का डिब्बे में बंद फोटो पुलिस को मिला। |
| जिस नंबर से तुषार को सांप को फोटो आया था, उस मोबाइल धारक सोनू को उठाकर पूछताछ की गई। |
| सपेरे सोनू ने कबूल किया कि उदय के साथ मिलकर सांप पकड़कर तुषार को दिया था। |
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
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लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
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पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


