लखनऊ कोर्ट में वकील की पिटाई; हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, विशेष पीठ करेगी सुनवाई
लखनऊ में जनपद न्यायालय परिसर में मंगलवार को एक वकील और उनके मुवक्किल की पिटाई कर दी गई। हाईकोर्ट ने कुछ घंटे बाद ही मामले का संज्ञान लिया और सुनवाई के लिए विशेष पीठ का गठन कर दिया है।

राजधानी लखनऊ में कैसरबाग स्थित जनपद न्यायालय परिसर में मंगलवार को एक सिविल मामले में वकालतनामा दाखिल करने पहुंचे वकीलों और उनके मुवक्किल के साथ मारपीट और बदसलूकी का मामला सामने आया है। मामले की संवेदनशीलता और न्याय प्रक्रिया में बाधा डालने की स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मंगलवार को ही शाम करीब 7 बजे पीड़ित वकीलों के प्रार्थना पत्र पर संज्ञान लिया तथा मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर विशेष खंडपीठ का गठन किया गया।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की विशेष खंडपीठ ने मामले पर त्वरित सुनवाई की। न्यायालय ने घटना को अत्यंत गंभीर मानते हुए लखनऊ के पुलिस आयुक्त और जिला जज से बुधवार सुबह सवा दस बजे तक इस पूरे मामले में व्यक्तिगत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
वकीलों को जान बचाने के लिए जज चैंबर की ओर भागना पड़ा
हाईकोर्ट में दिल्ली से आए अधिवक्ताओं अभिप्सा मोहंती, कोमल अग्रवाल और आशुतोष श्रीवास्तव द्वारा दी गई अर्जी में आरोप लगाया गया कि वे जिला अदालत लखनऊ में मोहम्मद शाकिर बनाम सौरभ वर्मा नामक मुकदमे में वादी मोहम्मद शाकिर की ओर से वकालतनामा पेश करने आए थे। मामले का प्रतिवादी जो वकील भी है, सौरभ कुमार वर्मा और उसके सहयोगियों ने उन्हें अदालत में उपस्थित होने से रोका, मारपीट की और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए धमकी दी। जब वकीलों ने अपने मुवक्किल को बचाने का प्रयास किया तो वकील आशुतोष श्रीवास्तव के पेट और छाती पर मुक्के मारे गए। इसके बाद आरोपी वकीलों ने वादी को कॉरिडोर में ले जाकर इतनी बेरहमी से पीटा कि वह लहूलुहान हो गया। वकीलों को अपनी जान बचाने के लिए कोर्ट नंबर 41 के जज के चैंबर और सीढ़ियों की तरफ भागना पड़ा।
सुनवाई के दौरान वीडियो भी दिखाया गया
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान उपस्थित पीड़ित अधिवक्ताओं द्वारा घटना का एक वीडियो चलाया गया, जिसमें कुछ अधिवक्ता जिनकी पहचान सौरभ कुमार वर्मा आदि के रूप में की गई, वादी के साथ मारपीट करते हुए दिखाई दे रहे हैं। कोर्ट ने वीडियो और बयानों का संज्ञान लेते हुए प्रथम दृष्टया घटना को अत्यंत गंभीर माना है। सुनवाई के दौरान जिला जज, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट व पुलिस कमिश्नर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मौजूद रहे।
जिला जज लखनऊ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट को सूचित किया कि उन्होंने सीसीटीवी फुटेज देखकर मारपीट में शामिल कुछ वकीलों की पहचान कर ली है। हाईकोर्ट ने बुधवार सुबह सवा एक बजे तक सीसीटीवी फुटेज और विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। वहीं पुलिस आयुक्त लखनऊ, अमरेंद्र कुमार सेंगर ने कोर्ट को बताया कि पीड़ित शाकिर को मेडिकल जांच के लिए भेजा गया है।
हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को आरोपी सौरभ कुमार वर्मा, अभय प्रताप वर्मा, हर्षित पांडे व अन्य का आपराधिक इतिहास जुटाकर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पीड़िता अधिवक्ताओं को लखनऊ में प्रवास के दौरान पर्याप्त पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाए। साथ ही पुलिस को निर्देश दिया गया कि वे वादी मोहम्मद शाकिर को बुधवार को अदालत के समक्ष सुरक्षित पेश करें।
कोर्ट कर्मचारी की भूमिका भी संदिग्ध
याचियों के अनुसार, वादी का एक संपत्ति को लेकर रियाजुद्दीन नामक व्यक्ति से विवाद चल रहा था, जिसने मुकदमे के दौरान ही वह संपत्ति अधिवक्ता सौरभ कुमार वर्मा को हस्तांतरित कर दी थी। स्थानीय स्तर पर कोई अन्य वकील केस लड़ने को तैयार नहीं था, इसलिए दिल्ली के अधिवक्ताओं को नियुक्त किया गया था। अदालत ने इस बात पर भी संज्ञान लिया कि जिला अदालत के ज्ञान नज़्म के एक कर्मचारी ने वादी को बुलाने का दबाव डाला था, जिसके बाद ही मारपीट की यह घटना घटी।
यह था मामला
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महिला वकील की जरूरी अपील पर संज्ञान लिया। वकील ने आरोप लगाया था कि लखनऊ जिला कोर्ट परिसर में बार एसोसिएशन के एक पदाधिकारी ने उनके और उनके मुवक्किल के साथ मारपीट की। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) ने कहा कि चैंबर में जाने के बाद मैं उनसे (इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के जस्टिस राजन रॉय, जो लखनऊ जिला कोर्ट के प्रशासनिक जज भी हैं) बात करूंगा। उन्होंने महिला वकील से, जो आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करती हैं, अपनी शिकायत लेकर जस्टिस रॉय से मिलने को कहा।
पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी शामिल थे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पीठ के सामने पेश होते हुए वकील ने तुरंत दखल की मांग की और कहा कि यह मामला बहुत जरूरी है। मैं सुनवाई के लिए लखनऊ जिला कोर्ट आई थी। प्रतिवादी बार एसोसिएशन का पदाधिकारी हैं। वह हमें मामले में पेश नहीं होने दे रहे हैं। उन्होंने हमारे साथ मारपीट की है। हमारा मुवक्किल अभी भी बार एसोसिएशन के ऑफिस में बंधक बना हुआ है। उसके पास बंदूक है। वकील के मुताबिक, वह पहले हाईकोर्ट गई थीं, जहां उनसे कहा गया कि अगर मामला इतना जरूरी है तो वह सुप्रीम कोर्ट जाएं। सीजेआई ने उनसे तुरंत जस्टिस रॉय से मिलने को कहा।
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Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।
पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।


