लेम्बोर्गिनी कार ने ऑटो और बुलेट में मारी टक्कर, शीशा तोड़कर निकाला गया तंबाकू व्यापारी का बेटा

Dinesh Rathour कानपुर
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कानपुर में वीआईपी रोड पर तंबाकू व्यापारी की लेम्बोर्गिनी कार ऑटो और बुलेट में टक्कर मारने के बाद फुटपाथ पर चढ़ गई। हादसे में फुटपाथ पर खड़ा युवक घायल हो गया।

लेम्बोर्गिनी कार ने ऑटो और बुलेट में मारी टक्कर, शीशा तोड़कर निकाला गया तंबाकू व्यापारी का बेटा

कानपुर में वीआईपी रोड पर तंबाकू व्यापारी की लेम्बोर्गिनी कार ऑटो और बुलेट में टक्कर मारने के बाद फुटपाथ पर चढ़ गई। हादसे में फुटपाथ पर खड़ा युवक घायल हो गया। बुलेट सवार दो युवक भी मामूली रूप से चोटिल हुए हैं। कार चला रहे तंबाकू व्यापारी केके मिश्रा के बेटे शिवम अंदर अचेत से हो गए। दूसरी कार से पहुंचे निजी सुरक्षा गार्ड कार का शीशा तोड़कर उन्हें बाहर निकालने लगे तो स्थानीय लोगों ने घेर लिया। इस पर स्थानीय लोगों और सुरक्षा गार्डों में धक्का-मुक्की हो गई। इसके बाद तंबाकू व्यापारी को उपचार के लिए निजी अस्पताल ले गए। वहीं ग्वालटोली पुलिस ने घायल युवक को उर्सला अस्पताल भिजवाया। परिजनों ने बताया कि शिवम को दौरे आते हैं। हादसा इसी वजह से हुआ है।

आर्यनगर निवासी तंबाकू व्यापारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा रविवार दोपहर लेम्बोर्गिनी कार से वीआईपी रोड से जा रहे थे। कार पर दिल्ली का नंबर लिखा था। अचानक रिंग वाला चौराहा के पास उनकी कार सड़क किनारे खड़ी ऑटो और बुलेट में टक्कर मारने के बाद फुटपाथ पर चढ़ गई। फुटपाथ पर खड़ा चमनगंज निवासी तौफीक अहमद के पैर में चोट आई। साथ ही बुलेट सवार खलासी लाइन निवासी विशाल त्रिपाठी और सोनू त्रिपाठी भी मामूली रूप से चुटहिल हो गए। हादसे की जानकारी होने पर स्थानीय लोगों ने कार को घेर लिया। इस दौरान शिवम की कार के पीछे फॉर्च्युनर कार से चल रहे उनके निजी सुरक्षा गार्डों ने उन्हें अचेत अवस्था में देखा तो बाहर निकालने का प्रयास करने लगे। इस पर गार्डों और स्थानीय लोगों में धक्का-मुक्की हो गई।

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तत्काल स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस के पहुंचने से पहले तंबाकू व्यापारी के बेटे को सुरक्षा गार्डों ने कार का शीशा तोड़कर निजी अस्पताल ले गए। मौके पर पहुंची ग्वालटोली पुलिस ने तौफीक को उर्सला अस्पताल भेजा। साथ ही कार ग्वालटोली थाने लाई गई। वहीं शिवम के परिवार के लोगों ने बताया कि छह माह से उन्हें दौरे आ रहे हैं। उनका इंग्लैंड से इलाज चल रहा है। अचानक दौरा पड़ने से यह हादसा हुआ है। डीसीपी सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। पीड़ित पक्ष से तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

थाने में कार को किया कवर

मामला हाई प्रोफाइल होने के कारण पुलिस दबाने में जुट गई। पुलिस कार को ग्वालटोली थाने ले गई। थाने परिसर के अंदर कार को खड़ा कर उसे कवर कर दिया गया। आलाधिकारियों तक सूचना पहुंची तब कार से कवर हटाया गया।

12 करोड़ की कार देखने के लिए जुटी भीड़

हादसे के बाद व्यापारी की पैरवी के लिए कई सफेदपोश लोग थाने पहुंच गए। साथ ही घटना में घायल होने वाले युवक और क्षतिग्रस्त वाहनों के मालिकों के पक्ष के लोग भी पहुंचने लगे। वहीं ग्वालटोली थाने के अंदर करीब 12 करोड़ रुपये की कीमत की कार खड़ी होने की सूचना पर स्थानीय लोगों को भीड़ जुटने लगी। छोटे बच्चे हो या युवक हर कोई कार देखने और वीडियो बनाने में जुट गया। थाने के अंदर और बाहर भारी भीड़ लगी रही। पुलिस को मजबूरन कई बार बल प्रयोग करना पड़ा।

Dinesh Rathour

लेखक के बारे में

Dinesh Rathour

दिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका (डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।

पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी है।

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