
वन्य जीवों की सुरक्षा को अण्डरपास याफिर एलिवेटेड हाईवे बेहद जरूरी
Lalitpur News - वन्य जीवों की सुरक्षा को अण्डरपास याफिर एलिवेटेड हाईवे बेहद जरूरी घातक बनता जा रहा राष्ट्रीय राजमार्ग के छह किलोमीटर का यह हिस्सावन्य जीव दुर्घटना बाह
दुर्घटनाओं में लगातार हो रहीं मौतों के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अधिकारियों से सम्पर्क साधा है। डीएफओ ललितपुर ने पीडी एनएचएआई को पत्र लिखकर दुर्घटना बाहुल्य छह किलोमीटर के हिस्से में अंडरपास याफिर एलिवेटेड हाईवे बनाने को आवश्यक बताया है। परियोजना निदेशक एनएचएआई सागर सेक्शन को लिखे पत्र में प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी ने बताया कि झांसी-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग के किलोमीटर 130 से 140 के मध्य वन्यजीवों के सुरक्षित आवागन के लिए आवश्यक कदम उठाने जरूरी हो गए हैं। यह हिस्सा ललितपुर जनपद के गौंना वन रेंज क्षेत्र से गुजरता है।
यह एक सक्रिय वन्यजीव कॉरिडोर है। जहां तेंदुआ सहित अन्य वन्य जीवों का नियमित आवागमन रहता है। सितम्बर माह में इसी राजमार्ग के किलोमीटर 135-136 के पास एक वयस्क नर तेंदुए की तेज रफ्तार वाहन से टक्कर के कारण मृत्यु हो गई थी। इसके बाद फिर से हादसे में माता तेंदुआ की भी सड़क दुर्घटना में मृत्यु हुई है। मप्र के मालथौन में भी इसी सड़क पर दुर्घटना में दो तेंदुओं की मौत हो चुकी है। इन स्थितियों को ध्यान में रखकर झांसी-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग के इस संकटग्रस्त हिस्से पर वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए एक दीर्घकालिक व टिकाऊ समाधान के रूप में अंडरपास अथवा पिलरों पर एलिवेटेड हाईवे बनाया जाना जरूरी हो गया है। यह कदम न केवल वन्यजीवों की रक्षा करेगा, बल्कि राजमार्ग पर यात्रा करने वाले मानव जीवन की सुरक्षा को भी बढ़ाएगा। अंडरपास और पिलरों पर एलिवेटेड हाईवे निर्माण में समय लग सकता है। इसलिए तत्कालिक प्रभाव से वन्य जीव दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र में गति सीमा कम करने के लिए साइन बोर्ड लगवाने संग स्पीड ब्रेकर बनाए जाने चाहिए। इस संबंध में डीएफओ ने बताया कि उन्होंने एनएचएआई अफसरों को पत्र लिखने के साथ ही विभागीय आला अफसरों को भी इसकी जानकारी दी है।

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