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गोदाम फुल, अब गेहूं भंडारण का संकट

ललितपुर। भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण गेहूं खरीद अधिकारियों के लिए बवाल-ए-जान बनती जा रही है। अभी तक 77,000 मीट्रिक टन गेहूं खरीदने के बाद 63,000 एमटी गोदामों में सुरक्षित रखने की व्यवस्था है। लगभग 14,000 मीट्रिक टन गेहूं को गोदाम की दरकार है। जनपद के किसानों को गेहूं का उचित दाम दिलाने के लिए 1,40,000 मीट्रिक टन खरीद का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण इलाकों, ब्लाक,तहसील व जिला मुख्यालय के आस पास गेहूं क्रय केंद्र खोले गए। प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देश पर स्थान चयन के पश्चात लगभग नब्बे क्रय केंद्र क्रियान्वित हुए और किसानों का गेहूं खरीदा जाने लगा। बेहतर उत्पादन व बाजारू कीमत से अधिक समर्थन मूल्य मिलता देख किसानों ने क्रय केंद्रों की ओर रूख किया और गेहूं की सरकारी खरीद गति पकड़ गयी। अब तक कुल 77,000 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। अभी कई कई दिनों तक खरीद होने है। जिसकी वजह से लक्ष्य के करीब गेहूं खरीद होने की उम्मीद जतायी जा रही है। लेकिन, यह खरीद अधिकारियों के लिए बड़ी मुसीबत बनती जा रही है। कारण, जनपद में गेहूं भंडारण की पर्याप्त जगह मौजूद नहीं है। बुढ़वार गोदाम, महेशपुरा वेयर हाऊस, झांसी ललितपुर बाईपास स्थित नवीन गल्ला मंडी के एसडब्ल्यूसी वेयर हाऊस, अमरपुर गोदाम, अमरपुर मंडी शेड, बिघा खेत गोदाम में गेहूं रखा जा चुका है। नवीन गल्ला मंडी के चबूतरों पर गेहूं भंडारण जारी है। इस तरह बमुश्किल 63,000 मीट्रिक टन गेहूं सुरक्षित रखने की संभावना है। इन स्थितियों में 14,000 मीट्रिक टन गेहूं क्रय केंद्रों पर अव्यवस्थित ढंग से रखा हुआ है। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों का कहना है कि गैर जनपद गेहूं भेजने के लिए रेलवे से रैक मांगी गयी है। रैक मिलते ही गेहूं बाहर भेजा जाएगा और गोदाम की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।लक्ष्य प्राप्ति के लिए खरीद जारीललितपुर। जहां एक तरह गेहूं भंडारण की समस्या अफसरों को परेशान किए है वहीं किसान लगातार क्रय केंद्र पर पहुंच रहे हैं। प्रतिदिन उनका गेहूं खरीदा जा रहा है। जानकारों के मुताबिक यदि एक लाख मीट्रिक टन खरीद हो गयी तो गेहूं को सुरक्षित रखना अधिकारियों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा।कृषकों का नौ करोड़ रुपये बकायाललितपुर। गेहूं खरीदने के बाद राज्य सरकार ने भले ही किसानों को अड़तालीस घंटे में भुगतान के निर्देश दे रखे हों लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। पीसीएफ ने 657.99 लाख रुपये किसानों का अटका रखा है। वहीं समितियों ने 313.05 लाख रुपये अभी तक भुगतान नहीं किया। इन हालातों में किसानों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने नियमानुसार भुगतान कराए जाने की मांग उठायी है।

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  • Web Title:Warehouse full, now the crisis of wheat storage