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मंत्री पुत्र के वाहन से हादसे में घायल एक और युवक की मौत

मंत्री पुत्र के वाहन से हादसे में घायल एक और युवक की मौत

संक्षेप:

Lalitpur News - ललितपुर में 26 जनवरी की रात राज्यमंत्री मनोहरलाल पंथ के बेटे नरेश पंथ की गाड़ी से तीन ग्रामीण घायल हुए, जिनमें से शिवेंद्र की मौत हो गई। अनुज की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया है क्योंकि इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया गया है।

Feb 10, 2026 09:27 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, ललितपुर
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ललितपुर। 26 जनवरी की देर रात्रि राज्यमंत्री मनोहरलाल पंथ के पुत्र नरेश पंथ के वाहन की चपेट में आकर घायल बरखेरा ग्राम निवासी एक और ग्रामीण ने बीती देर रात मेडिकल कालेज झांसी में दम तोड़ दिया। वहीं एक अन्य व्यक्ति मेडिकल कालेज में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। धाना जाखलौन क्षेत्र अन्तर्गत ग्राम पंचायत बरखेरा के पास 26 जनवरी सोमवार देर रात्रि जाखलौन से ललितपुर की ओर लौट रहे राज्यमंत्री के पुत्र नरेश पंथ के चार पहिया वाहन की चपेट में आकर बाइक सवार 21 वर्षीय शिवेंद्र पुत्र राजेंद्र यादव, 48 शंकर पुत्र इमरत सिंह यादव, 20 वर्षीय अनुज पुत्र रतीराम निवासीगण बरखेरा गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

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ग्रामीणों ने घायल तीनों व्यक्तियों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय पहुंचाया था। यहां चिकित्सकों ने शिवेंद्र को मृत घोषित कर दिया था। वहीं शंकर और अनुज की हालत गम्भीर होने की वजह से दोनों को झांसी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां से चार दिन बाद 31 जनवरी को दोनों घायल मेडिकल कालेज भेज दिए गए थे। आठ फरवरी की देर रात्रि अनुज ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने देर रात्रि शव का पंचनामा भरकर तीन बजे मृतक का पोस्टमार्टम कराया और सुबह चार बजे शव मृतक के परिजनों के सुपुर्द कर दिया। इस दुर्घटना में दो युवकों की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। उपचार में नहीं किया कोई सहयोग ललितपुर। अनुज की मौत के बाद उसके परिजनों ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने मृतक शिवेंद्र के घर जाकर हादसे पर दुख जताया था और घायलों के बेहतर उपचार का भी आश्वासन दिया था। लेकिन, निजी अस्पताल में हो रहे उपचार में सहयोग के बजाए अनुज और शंकर को मेडिकल कालेज झांसी में भर्ती करा दिया गया। जहां इलाज में लापरवाही से अनुज की मौत हो गयी और शंकर की भी हालत नाजुक है। फसल बेची और गिरवी रखे खेत ललितपुर। बरखेरा में रहने वाले ग्रामीणों ने बताया कि अनुज के उपचार पर बहुत पैसा खर्च हो रहा था। इधर उधर से इंतजाम करने के बाद रतिराम ने पहले तीन एकड़ में खड़ी फसल बेच दी। फिर अपने खेत को गिरवी रख दिया। बावजूद इसके वह अपने बेटे को मौत के मुंह से वापस नहीं ला सका।