
एसडीएम पाली पर विधिविरुद्ध कई व्यक्तियों को जेल भजने का आरोप
Lalitpur News - ललितपुर के पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष जगदीश सिंह लोधी ने उप जिलाधिकारी नेशान्त तिवारी पर अनुच्छेद-21 के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि तिवारी ने कई व्यक्तियों को बिना कानूनी प्रक्रिया के जेल भेजा है, जिससे जनता में भय और आक्रोश है। उन्होंने उचित कार्रवाई की मांग की है।
ललितपुर। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष एडवोकेट जगदीश सिंह लोधी ने उप जिलाधिकारी पाली पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’ के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने इस तरह के मामलों से प्रभारी को अवगत कराया और आवश्यक कार्रवाई के लिए मांग उठाई। मुख्य सचिव को संबोधित ज्ञापन में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष ने बताया कि उप जिला मजिस्ट्रेट तहसील पाली के पद पर पदस्थ नेशान्त तिवारी संविधान के अनुच्छेद-21 में वर्णित मौलिक अधिकार ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’ का खुलेआम उल्लंघन करते हुए विधि विरुद्ध कई व्यक्तियों को जेल भेजा और यह क्रम अभी भी जारी है।

उन्होंने दावा किया कि उप जिला मजिस्ट्रेट को विधि अनुसार जेल भेजकर दण्ड देने का अधिकार नहीं है। उदाहरण स्वरूप 03 नवंबर 2025 को धारा 170, 126, 135 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के तहत पुष्पेन्द्र पुत्र हरजू कुर्मी निवासी ग्राम मुड़िया थाना नाराहट, अमोल पुत्र नन्दू अहिरवार निवासी ग्राम दैनपुरा थाना नाराहट, दीपेन्द्र पुत्र रामगोपाल, रामनरेश पुत्र प्रहलाद निवासीगण ग्राम करमरा थाना पाली को गैर कानूनी तरीके से जेल भेजा गया। इसी प्रकार 10 नवंबर 2025 को कृष्णप्रताप सिंह पुत्र गोपाल सिंह निवासी ग्राम दिगवार थाना नाराहट को भी जेल भेजा गया, जबकि विधि अनुसार आरोपितों को तत्काल जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए था। विचारण उपरान्त यदि आरोपितों पर आरोप सिद्ध होता है तो उप जिला मजिस्ट्रेट व्यक्तिगत्त मुचलका या जामीनदारों की प्रतिभूतियों पर रिहा करेंगे। आरोपित यदि जामीनदारों की प्रतिभूतियां देने में असमर्थ हों तो उसे जेल भेजा जा सकता है। बावजूद इसके उप जिला मजिस्ट्रेट मनमानी करते हुए विधि विरुद्ध क्रिया कलाप कर रहे हैं। जो व्यक्तियों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का भी हनन है। पूर्व जिलाध्यक्ष के मुताबिक इससे आम जनता में काफी भय और आक्रोश है, जिससे लोकप्रिय सरकार की छवि धूमिल हो रही है। उन्होंने जेल भेजे गए व्यक्तियों की पत्रावलियां तत्काल प्रभाव से शील करने संग उनके मजिस्ट्रेटियल अधिकारों के सम्बन्ध में भी विधिक कार्रवाई के लिए मांग की।

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