एफएओ और इक्रीसेट ने जनपद में चारा दुग्ध विकास की सम्भावनाओं को टटोला

Feb 28, 2026 11:15 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, ललितपुर
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Lalitpur News - फोटो- 2कैप्सन- खाद्य एवं कृषि संगठन की टीम के साथ चर्चा करते मुख्य विकास अधिकारी शेषनाथ सिंहएफएओ और इक्रीसेट ने जनपद में चारादुग्ध विकास की सम्भावनाओं

एफएओ और इक्रीसेट ने जनपद में चारा दुग्ध विकास की सम्भावनाओं को टटोला

दुग्ध उत्पादन के जरिए जनपद के किसानों की आय में बढ़ोत्तरी के लिए हरे चारे के उत्पादन की संभावनाओं को गंभीरता से टटोला जाने लगा है। शनिवार को इंटरनेशनल क्राप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट और खाद्य एवं कृषि संगठन की संयुक्त टीम ने मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय में कई विभागों के अफसरों संग एक बैठक की। बुंदेलखंड स्थित ललितपुर जनपद में दुग्ध उत्पादन की असीम संभावनाएं हैं। इस दिशा में अभी तक किए गए कार्यों ने किसानों को उनके दूध की अच्छी कीमत दिलानी शुरू कर दी। इस छोटी सी सफलता को बड़ा रूप देने की संभावनाओं को टटोलने के लिए शनिवार को इंटरनेशनल क्राप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट और खाद्य एवं कृषि संगठन की संयुक्त टीम जनपद आई।

इस दल में शामिल इंटरनेशनल क्राप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के उप महानिदेशक डा. स्टेनफोर्ड ब्लेड, सहायक महानिदेशक संजय अग्रवाल तथा खाद्य एवं कृषि संगठन के एड्रेयन बारेंस, कृष्णन पल्लसाना, माया नायर ने इक्रीसेट के प्रधान वैज्ञानिक डा. रमेश सिंह, डा. कौशल गर्ग, सलाहकार आरके उत्तम, वैज्ञानिक डा. अभिषेक दास, सहायक वैज्ञानिक अशोक शुक्ला व डा. इसरार मजीद के साथ जनपद में पशुपालन की स्थिति को समझा। फिर मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय में सीडीओ शेषनाथ सिंह व कृषि, पशुपालन, वन और उद्यान विभाग के अफसरों संग बैठक करके हरे चारे के उत्पादन पर चर्चा की। दल के सदस्यों के मुताबिक हरे चारे के सेवन और नश्ल सुधार से स्थानीय गोवंश व अन्य पशु अच्छी मात्रा में दूध देने लगेंगी, इसलिए हरा चारा उगाने के लिए भूमि की उपलब्धता बेहद आवश्यक है। इस पर मुख्य विकास अधिकारी ने इस दिशा में हो रहे कार्यों से दल को अवगत कराया। एफएओ के सदस्यों ने बताया कि उनका मुख्य लक्ष्य ललितपुर और झांसी में चारा उत्पादन को बढ़ावा देकर दुग्ध उत्पादन में वृद्धि संग चारा बैंक की स्थापना के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना है। जिला स्तर की आवश्यकताओं के अनुरूप वह एक समग्र और व्यवहारिक परियोजना तैयार करेंगे। इसके उपरांत टीम ने पूराबिरधा गांव में वर्षा जल संरक्षण व प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के कार्यों का अवलोकन करके उससे आए बदलाव को भी परखा। उन्होंने इन कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वैज्ञानिक व तकनीकी मार्गदर्शन और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से पूर्व में बंजर पड़ी भूमि को पुन: खेती योग्य बनाया गया है। पहले ग्रामीण आजीविका की तलाश में पलायन के लिए विवश थे, वहीं अब सभी परिवार गांव में स्थायी रूप से बसकर कृषि एवं पशुपालन से अपनी आजीविका सुदृढ़ कर रहे हैं। अधिकारियों ने जल संरक्षण संरचनाओं के प्रभाव, भूजल स्तर में सुधार तथा किसानों को प्राप्त हो रहे प्रत्यक्ष लाभों का भी जायजा लिया।

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